उच्च न्यायालय ने राहत कार्य के लिए ट्रस्ट के निषिद्ध क्षेत्र में जाने की याचिका खारिज की
सिविलियन वेलफेयर एंड डेवलपमेंट ट्रस्ट ने मध्य दिल्ली के चांदनी महल निषिद्धि क्षेत्र (कंटेनमेंट जोन) में अपने गोदाम से राशन और अन्य सामग्री बांटने के लिए जाने देने की अनुमति मांगी थी ।
नयी दिल्ली, 29 अप्रैल दिल्ली उच्च न्यायालय ने निषिद्ध क्षेत्र में राहत कार्य के लिए वहां जाने की अनुमति देने का अनुरोध करने वाले एक परोपकारी ट्रस्ट की याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने कहा कि इस तरह के आग्रह से कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने में प्रशासन के प्रयासों पर पानी फिर सकता है।
सिविलियन वेलफेयर एंड डेवलपमेंट ट्रस्ट ने मध्य दिल्ली के चांदनी महल निषिद्धि क्षेत्र (कंटेनमेंट जोन) में अपने गोदाम से राशन और अन्य सामग्री बांटने के लिए जाने देने की अनुमति मांगी थी ।
न्यायमूर्ति सी हरि शंकर ने कहा कि यह याचिका पूरी तरह सारहीन है और इसमे यह संकेत देने वाली कोई सामग्री नहीं है जिससे यह संकेत मिलता हो कि चांदनी महल निषिद्ध क्षेत्र में प्रशासन लोगों को जरूरी सामान मुहैया नहीं करा रहा है ।
उच्च न्यायालय ने कहा कि ऐसी याचिकाओं को जनहित याचिका नहीं बताया जा सकता, दरअसल ये जनहित के उलट हैं।
न्यायमूर्ति हरि शंकर ने अपने आदेश में यह भी कहा कि उन्होंने 15 अप्रैल को भी ट्रस्ट की इसी तरह की एक याचिका खारिज करते हुए 10,000 रुपये का जुर्माना लगाया था, लेकिन अब फिर से मुद्दे को उठाया गया।
अपने बचाव में ट्रस्ट ने कहा कि वह मुद्दे को फिर से नहीं उठा रहा क्योंकि पूर्व में उसने अदालत का ध्यान आपदा प्रबंधन कानून के प्रावधानों की ओर नहीं दिलाया था जिसके तहत निषिद्ध क्षेत्र में संगठनों को जाने की अनुमति होती है ।
हालांकि, अदालत ने कहा कि कानून का कोई भी प्रावधान निषिद्ध क्षेत्र में जाने और राशन तथा अन्य सामान बांटने के लिए ट्रस्ट की याचिका का समर्थन नहीं करता ।
न्यायाधीश ने कहा कि 15 अप्रैल के मामले में उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा था कि निषिद्ध क्षेत्र में किसी भी व्यक्ति को जाने की अनुमति देने का सवाल ही नहीं उठता है।
न्यायमूर्ति हरि शंकर ने 27 अप्रैल के अपने आदेश में कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि खुद को ‘सिविलियन वेलफेयर एंड डेवलपमेंट ट्रस्ट’ कहने वाला संगठन निषिद्ध क्षेत्र में पहुंच के लिए बार-बार ऐसी याचिकाएं दाखिल कर रहा है ।
अदालत ने कहा कि इस तरह की हरकत जनहित के प्रतिकूल है और आपदा प्रबंधन कानून के प्रावधानों का उल्लंघन है ।
न्यायाधीश ने कहा कि वह ट्रस्ट पर पहले ही जुर्माना लगा चुके हैं, इसलिए उसे दुबारा ऐसा करने से परहेज करना चाहिए था।
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(The above story first appeared on LatestLY on Apr 29, 2020 05:58 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

