देश की खबरें | उच्च न्यायालय ने जंतर-मंतर के यंत्रों की स्थिति पर रिपोर्ट दााखिल करने का निर्देश दिया
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. दिल्ली उच्च न्यायालय ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) को यहां जंतर-मंतर के यंत्रों की कार्यक्षमता की स्थिति के बारे में एक रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है।
नयी दिल्ली, छह फरवरी दिल्ली उच्च न्यायालय ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) को यहां जंतर-मंतर के यंत्रों की कार्यक्षमता की स्थिति के बारे में एक रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है।
न्यायमूर्ति मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा अदालत के सितंबर 2010 के आदेश का कथित रूप से पालन नहीं करने के लिए प्राधिकारों के खिलाफ एक अवमानना याचिका पर सुनवाई कर रहे थे। आदेश के समय एएसआई ने यह वचन दिया था कि जंतर-मंतर को उसकी क्षमता के अनुसार उसके मूल गौरव को बहाल किया जाएगा और वहां मौजूद खगोलीय यंत्रों को क्रियाशील बनाया जाएगा।
याचिकाकर्ता ने कहा कि वर्तमान कार्यवाही में मुख्य मुद्दा यह है कि जंतर-मंतर के यंत्र सक्रिय स्थिति में नहीं हैं और 12 साल बीत जाने के बावजूद चीजें बदली नहीं हैं।
याचिका पर सुनवाई करते हुए, उच्च न्यायालय ने 20 जनवरी को एक आदेश पारित किया था जिसमें उसने एएसआई को चार सप्ताह के भीतर स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया और विशेष रूप से वहां पर यंत्रों की स्थिति पर रुख बताने को कहा।
अदालत ने याचिकाकर्ता से यह भी कहा कि वह एएसआई का हलफनामा जमा होने के बाद अपना जवाब दाखिल करे। अदालत ने मामले को 24 अप्रैल को आगे की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया।
उच्च न्यायालय की एक पीठ ने 2010 में एएसआई की ओर से दिए गए एक वचन को दर्ज करते हुए एक आदेश पारित किया था कि जंतर-मंतर को कार्यात्मक बनाया जाएगा और इसके मूल वैभव को बहाल किया जाएगा।
केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार को भी एएसआई को आवश्यक सहयोग देने के लिए अदालत द्वारा निर्देश दिया गया था ताकि वे जंतर-मंतर के वैभव को बहाल करने लिए काम कर सकें। अदालत ने 2010 का आदेश एक याचिका पर पारित किया था जिसमें शिकायत की गई थी कि दिल्ली में जंतर मंतर विभिन्न कारणों से कार्यात्मक स्थिति में नहीं है।
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