देश की खबरें | उच्च न्यायालय ने डीयू को दाखिले के लिए गुमराह करने वाले अर्हता मानदंड वेबसाइट से फौरन हटाने का निर्देश दिया
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) को अपनी वेबसाइट से ऐसी सभी सामग्री हटा कर सुधारात्मक उपाय करने को कहा है, जो इसकी सूचना बुलेटिन में दाखिले के लिए बताई गई अर्हता मानदंड के उलट हैं।
नयी दिल्ली, दो फरवरी दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) को अपनी वेबसाइट से ऐसी सभी सामग्री हटा कर सुधारात्मक उपाय करने को कहा है, जो इसकी सूचना बुलेटिन में दाखिले के लिए बताई गई अर्हता मानदंड के उलट हैं।
उच्च न्यायालय ने कहा कि इस तरह के विरोधाभासी और गुमराह करने वाले मानदंड न सिर्फ उम्मीदवारों के मन में भ्रम पैदा करते हैं, बल्कि अवांछित वाद का भी मार्ग प्रशस्त करते हैं।
न्यायमूर्ति विकास महाजन ने 24 जनवरी को पारित एक आदेश में कहा, ‘‘...यह अदालत कहना चाहती है कि दिल्ली विश्वविद्यालय को अपनी वेबसाइट पर ऐसी सभी सामग्री की पहचान करने एवं उन्हें हटाने के लिए अविलंब सुधारात्मक उपाय करने की जरूरत है, जो किसी पाठ्यक्रम में दाखिले के लिए अर्हता मानदंड के सूचना बुलेटिन या वैधानिक नियमों और विश्वविद्यालय के अध्यादेशों में निर्धारित प्रावधान से उलट हैं।’’
उच्च न्यायालय ने डीयू से बीएससी(ऑनर्स) बायोलॉजिक साइंस में स्नातक एक छात्रा की याचिका खारिज कर दी। छात्रा ने कहा था कि 2022-23 अकादमिक वर्ष के लिए अन्य पिछड़ा वर्ग (गैर क्रीमी लेयर) उम्मीदवार के रूप में मेधा श्रेणी में एमएससी बॉटनी(वनस्पति विज्ञान) में दाखिले के लिए आवेदन दिया था, लेकिन उसकी उम्मीदवारी की अनदेखी की गई।
याचिका में कहा गया था कि याचिकाकर्ता के बीएससी(ऑनर्स) बॉयोलॉजिकल साइंस में 88.96 प्रतिशत अंक हासिल करने के बावजूद उसका चयन दाखिले के लिए नहीं किया गया, जबकि जिन उम्मीदवारों का चयन किया गया उनके अंकों का प्रतिशत उससे कम--88.71 प्रतिशत से लेकर 86.40 प्रतिशत--तक था।
छात्रा ने जब नामांकन शाखा से पूछताछ की, तो उसने पाया कि वह एमएससी बॉटनी पाठ्यक्रम में मेधा या प्रवेश परीक्षा आधारित दाखिले की योग्यता नहीं रखती है क्योंकि इसकी अर्हता मानदंड के लिए मुहैया की गई विवरणिका उसके पास नहीं थी।
छात्रा ने दलील दी कि वह एमएससी बॉटनी में दाखिले के लिए ऑनलाइन आवेदन फॉर्म से गुमराह हो गई, जिसमें मेधा आधारित श्रेणी के लिए अर्हता योग्यता में बीएसएसी (ऑनर्स) बायोलॉजिक सांइस भी शामिल था।
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