देश की खबरें | भ्रष्टाचार की शिकायतों के निर्धारित प्रारूप में होने पर ही लोकपाल में सुनवाई

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नयी दिल्ली, 26 अगस्त भ्रष्टाचार रोधी निकाय लोकपाल ने भ्रष्टाचार की शिकायतों के निर्धारित प्रारूप में होने पर ही उसे स्वीकार करने का फैसला किया है।

केंद्र सरकार ने मार्च 2020 में लोकपाल (शिकायत) नियम अधिसूचित किए थे, जो शिकायत दर्ज करने के लिए प्रारूप निर्धारित करते हैं।

इन नियमों के तहत लोकपाल ने पिछले साल जुलाई में एक परिपत्र जारी कर अपने कार्यालय में प्राप्त शिकायतों से निपटने के लिए अपनाई जाने वाली प्रक्रिया का विवरण दिया था।

इसके बाद, इस साल 10 फरवरी को एक शुद्धिपत्र के माध्यम से यह निर्णय किया गया था कि जो शिकायतें निर्धारित प्रारूप में नहीं होंगी उन्हें भी आवश्यक आदेश या कार्रवाई के लिए लोकपाल अध्यक्ष के समक्ष रखा जाएगा।

लोकपाल की पूर्ण पीठ ने शुद्धिपत्र में निहित प्रावधानों पर फिर से विचार किया।

लोकपाल ने 24 अगस्त को जारी एक आधिकारिक नोट में कहा, ‘‘ भारत के लोकपाल की पूर्ण पीठ ने निर्णय किया है कि भारत के लोकपाल के कार्यालय में अब से (तत्काल प्रभाव से) प्राप्त शिकायत (किसी भी माध्यम से - हाथ से/डाक द्वारा/ईमेल आदि के माध्यम से) निर्धारित प्रारूप में नहीं होगी तो उन पर लोकपाल एवं लोकायुक्त अधिनियम 2013 की धारा 20 के तहत सुनवाई नहीं की जाएगी।’’

धारा 20 लोकपाल द्वारा प्रारंभिक पड़ताल और जांच के संबंध में प्रक्रिया का विवरण दिया गया है।

शिकायत दे चुके शिकायतकर्ता को हालांकि ‘‘अंतिम अवसर के रूप’’ में 15 सितंबर तक शिकायतों को निर्धारित प्रारूप में भेजकर गलती सुधारने का मौका दिया जाता है।

इसके लिये फॉर्म लोकपाल की वेबसाइट पर उपलब्ध है।

लोकपाल ने कहा कि इस साल फरवरी में जारी उसके शुद्धिपत्र को ‘‘ वापस लिया जाता है।’’

भ्रष्टाचार रोधी निकाय लोकपाल को 2021-22 के दौरान 5,680 शिकायतें मिलीं। एक आरटीआई (सूचना का अधिकार) के जवाब में मिली जानकारी के अनुसार, पिछले वित्तीय वर्ष में मिली कुल शिकायतों में से 169 शिकायतें निर्धारित प्रारूप में थीं, जबकि 5,511 निर्धारित प्रारूप में नहीं थीं।

शिकायत दर्ज करने के लिए निर्धारित प्रारूप के फॉर्म के अनुसार, सभी शिकायतकर्ताओं को अनिवार्य रूप से ‘गैर न्यायिक स्टाम्प पेपर’ पर एक हलफनामा देना होता है, जिसमें अन्य बातों के अलावा उल्लेख किया जाता है कि ‘‘कोई भी झूठी, तुच्छ या पेरशान करने वाली शिकायत करने पर कारावास की सजा हो सकती है, जिसे एक वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है और जुर्माना भी हो सकता है, जिसे एक लाख रुपये तक बढ़ाया जा सकता है।’’

लोकपाल प्रधानमंत्री सहित सार्वजनिक पद पर काबिज लोगों के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच करने वाला शीर्ष निकाय है। न्यायमूर्ति पिनाकी चंद्र घोष के 27 मई को सेवानिवृत्त होने के बाद से लोकपाल के न्यायिक सदस्य न्यायमूर्ति प्रदीप कुमार मोहंती अध्यक्ष पद का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे हैं।

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