देश की खबरें | बाल चिकित्सा वार्ड में ‘‘स्वस्थ, तंदुरुस्त’’ बच्चे भर्ती, न्यायालय ने कॉलेज में 100 एमबीबीएस छात्रों के दाखिले पर रोक लगाई

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. महाराष्ट्र के एक कॉलेज के बारे में राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) की निरीक्षण रिपोर्ट को गंभीरता से लेते हुए उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को वहां 100 एमबीबीएस छात्रों के प्रवेश पर अगले आदेश तक रोक लगा दी। इस अस्पताल के बाल चिकित्सा वार्ड में सभी "स्वस्थ और तंदुरुस्त" बच्चे भर्ती पाए गए थे और रोगियों के रक्तचाप की रिपोर्ट भविष्य की तारीख की मिली थी।

नयी दिल्ली, आठ अप्रैल महाराष्ट्र के एक कॉलेज के बारे में राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) की निरीक्षण रिपोर्ट को गंभीरता से लेते हुए उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को वहां 100 एमबीबीएस छात्रों के प्रवेश पर अगले आदेश तक रोक लगा दी। इस अस्पताल के बाल चिकित्सा वार्ड में सभी "स्वस्थ और तंदुरुस्त" बच्चे भर्ती पाए गए थे और रोगियों के रक्तचाप की रिपोर्ट भविष्य की तारीख की मिली थी।

शीर्ष अदालत ने एनएमसी को दो महीने के भीतर अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) और मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज के प्रोफेसर रैंक के अधिकारियों द्वारा कॉलेज का फिर से औचक निरीक्षण किए जाने का निर्देश दिया ताकि यह देखा जा सके कि कॉलेज आवश्यक मानदंडों का पालन कर रहा है या नहीं।

न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस की पीठ, जिसने पहले कॉलेज की तुलना फिल्म 'मुन्ना भाई एमबीबीएस' से की थी, ने कहा कि उसने पहले बंबई उच्च न्यायालय की औरंगाबाद पीठ के आदेश को दरकिनार कर दिया था और मामले को वापस भेज दिया था लेकिन इसने अपने पहले के निष्कर्षों की फिर से पुष्टि की।

पीठ ने अपने आदेश में कहा, "इस स्तर पर प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि प्रवेश को रोकने के लिए आदेश जारी करने के अधिकार की कमी के संबंध में उच्च न्यायालय का निष्कर्ष राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग अधिनियम की धारा 25, 26 (एफ) के प्रावधान के मद्देनजर सही प्रतीत नहीं होता है। हम तदनुसार निर्देश देते हैं कि उच्च न्यायालय के आक्षेपित आदेश के संदर्भ में अनुच्छेद 37 में निहित परिचालन निर्देश, जो संस्थान को 2021-22 के शैक्षणिक वर्ष के लिए 100 एमबीबीएस छात्रों को प्रवेश देने की अनुमति देता है, अगले आदेश तक स्थगित रहेगा।"

इसने कहा कि अदालत को इस तथ्य से अवगत कराया गया है कि बंबई उच्च न्यायालय की औरंगाबाद पीठ के चार मार्च के फैसले के बाद एनएमसी द्वारा सात मार्च, 2022 को ‘कारण बताओ’ नोटिस जारी किया गया।

पीठ ने कहा, "मेडिकल कॉलेज से पूछा गया है कि 14 जुलाई, 2021 को पत्र द्वारा दी गई मान्यता और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम शुरू करने की अनुमति वापस क्यों नहीं ली जानी चाहिए।"

इसने कहा कि इस बीच 14 व 15 जनवरी, 2022 को किए गए निरीक्षण के दौरान जो कमियां पाई गईं, उन्हें देखते हुए कॉलेज को तत्काल प्रभाव से प्रवेश रोकने का निर्देश दिया गया है।

पीठ ने कहा कि उच्च न्यायालय ने एनएमसी समिति की निरीक्षण रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया है, लेकिन छात्रों के मामले में अनुमति दी है, जो उनके भविष्य को गंभीर रूप से प्रभावित करेगा।

शीर्ष अदालत ने कहा, "हम इस स्थिति को होने नहीं दे सकते। उच्च न्यायालय ने निरीक्षण रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया है। एक संतुलन, संस्था के पक्ष में नहीं, बल्कि छात्रों के पक्ष में बनाया जाना है। इस तरह के आदेश से गंभीर पूर्वाग्रह होता है। हमें छात्रों के हित की रक्षा करनी होगी, अन्यथा छह महीने बाद जब अनुमति वापस ले ली जाएगी तो वे कहीं के नहीं रहेंगे। पहले के दौर में, हमने आदेश को दरकिनार कर दिया और इसे वापस उच्च न्यायालय में भेज दिया तथा इसने अपने स्वयं के निष्कर्ष की पुन: पुष्टि की।’’

महाराष्ट्र के धुले जिले में स्थित मेडिकल कॉलेज अन्नासाहेब चूड़ामन पाटिल मेमोरियल मेडिकल कॉलेज की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता निदेश गुप्ता ने कहा कि वे पहले ही प्रवेश दे चुके हैं और छात्र वहां पढ़ रहे हैं।

उन्होंने कहा, "एनएमसी की अपील को स्वीकार करने से छात्रों के हित गंभीर रूप से खतरे में पड़ जाएंगे।"

पीठ ने कहा, ‘‘बस समझिए कि चिकित्सा शिक्षा कहां जा रही है। आपने बाल चिकित्सा वार्ड में स्वस्थ बच्चों को रखा, जिन्हें बिना किसी बीमारी के लाया गया और शाम तक वे सभी अपने घरों को वापस चले गए। 14 जनवरी को नर्सों के पास 16 जनवरी के बाद का रिकॉर्ड था कि मरीजों का रक्तचाप क्या होगा और रक्त के अन्य मानदंड क्या होंगे। यह पूरी तरह से छेड़छाड़ वाला डेटा है जो कॉलेज द्वारा तैयार किया गया था।’’

न्यायालय ने कहा कि तथाकथित मरीज ऐसे थे जिनकी पंजीकरण संख्या 11111.. और 66666... ​​थी और सभी मरीज स्वस्थ थे।

शीर्ष अदालत ने 14 फरवरी को कहा था कि यह बॉलीवुड फिल्म 'मुन्ना भाई एमबीबीएस' की तरह है, जहां वार्ड में मरीज "स्वस्थ और तंदुरुस्त" थे तथा "बाल चिकित्सा वार्ड में कोई गंभीर रोगी नहीं मिला।"

एनएमसी ने शीर्ष अदालत को बताया कि अतिरिक्त छात्रों के प्रवेश की अनुमति रद्द कर दी गई क्योंकि कॉलेज में कोई ऑपरेशन थिएटर नहीं है और अन्य कमियों के अलावा कोई एक्स-रे मशीन भी नहीं थी।

शीर्ष अदालत ने तब औरंगाबाद पीठ के आदेश को दरकिनार करते हुए नए सिरे से विचार करने को कहा था।

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