नयी दिल्ली, 28 फरवरी केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे पी नड्डा ने शुक्रवार को कहा कि मातृ मृत्यु दर (एमएमआर) और शिशु मृत्यु दर (आईएमआर) जैसे स्वास्थ्य संकेतकों में तेजी से गिरावट आने के साथ देश में 2014 से स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है।
नड्डा ने ओडिशा में एक कार्यक्रम में कहा, ‘‘भारत में मातृ मृत्यु दर में गिरावट वैश्विक गिरावट से दोगुनी है, जो जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य सेवा प्रणाली सुदृढ़ करने के प्रयासों को दर्शाती है। शिशु मृत्यु दर और 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर में भी उल्लेखनीय गिरावट देखी गई है।’’
उन्होंने ओडिशा के पुरी में, सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा प्रणाली में अच्छे एवं अनुकरणीय कार्यों और नवप्रवर्तन पर 9वें राष्ट्रीय शिखर सम्मेलन का उद्घाटन किया।
नड्डा ने स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में बड़ा बदलाव आने के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 को श्रेय दिया।
उन्होंने ‘लैंसेट’ पत्रिका द्वारा हाल में किये गए एक अध्ययन का भी उल्लेख किया, जिसमें कहा गया है कि आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री-जन आरोग्य योजना के तहत पंजीकृत मरीजों को 30 दिन के भीतर कैंसर का उपचार मिलने में 90 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जिससे उपचार में कम विलंब हुआ और कैंसर पीडितों पर वित्तीय बोझ भी घटा।
नड्डा ने कहा, ‘‘इसी तरह, भारत में 2015 से 2023 तक तपेदिक (टीबी) के मामलों में 17.7 प्रतिशत की उल्लेखनीय गिरावट आई है, जो विश्व स्वास्थ्य संगठन विश्व तपेदिक रिपोर्ट 2024 के अनुसार, वैश्विक औसत गिरावट 8. 3 प्रतिशत से दोगुनी है।’’
उन्होंने कहा कि कोविड-19 महामारी के कारण व्यवधानों के बावजूद भारत ने तपेदिक उन्मूलन के अपने लक्ष्य में कमी नहीं आने दी है।
किसी भी अभियान की सफलता के लिए जन भागीदारी के महत्व को रेखांकित करते हुए, नड्डा ने स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में प्राप्त उपलब्धियों का श्रेय ‘आशा’ कार्यकर्ताओं और जमीनी स्तर पर काम करने वाले अन्य स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को दिया।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत में स्वास्थ्य सेवा आधार को और मजबूत करने के लिए पंचायती राज संस्थाओं को और भी सशक्त बनाया जाना चाहिए।
गैर-संचारी रोगों के खतरों पर, नड्डा ने जीवनशैली में बदलाव लाने की आवश्यकता पर बल दिया।
नड्डा ने कहा कि अगले तीन वर्षों में देश के प्रत्येक जिले में ‘डे-केयर कैंसर सेंटर’ होंगे, अकेले इस वर्ष 200 जिलों को इसके दायरे में लाया जाएगा।
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