देश की खबरें | प्रस्तावित बीडीडी चॉल पुनर्विकास के ‘बेतरतीब तरीके’ पर अदालत ने फैसला सुरक्षित रखा
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मुंबई,19 दिसंबर बंबई उच्च न्यायालय ने मध्य मुंबई में बीडीडी चॉल के पुनर्विकास के प्रस्तावित तरीके के खिलाफ दो व्यक्तियों द्वारा दायर जनहित याचिका पर अपना आदेश सोमवार को सुरक्षित रख लिया।
शहर के निवासियों-शिरीष पटेल और सुलक्षणा महाजन-की ओर से दायर याचिका में दावा किया गया है कि जिस तरीके से पुनर्विकास प्रस्तावित है, वह इस महानगर में लोगों के स्वास्थ्य, कल्याण और जीवन के अधिकार को खतरे में डालेगा।
याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अस्पी चिनॉय ने सोमवार को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एस. वी. गंगापुरवाला और न्यायमूर्ति एस. जी. चपलगांवकर की खंडपीठ को बताया कि बीडीडी चॉल का पुनर्विकास किया जाएगा।
चिनॉय ने कहा, "डेवलपर्स ने सभी किरायेदारों को 11 इमारतों में आवास उपलब्ध कराने की व्यवस्था की है तथा प्रत्येक इमारत के बीच कोई जगह नहीं है...ताकि वे बिक्री के लिए 70-मंजिला इमारत का निर्माण कर सकें।"
उन्होंने आरोप लगाया कि गरीब और संपन्न लोगों के प्रति दोहरा मानदंड अपनाया जा रहा है।
सरकार की ओर से संचालित म्हाडा और महाराष्ट्र सरकार की ओर से पेश अधिवक्ता आशुतोष कुंभकोनी ने आरोपों का खंडन किया और कहा कि लगभग 16,000 मूल किरायेदारों में से किसी ने आज तक पुनर्विकास पर कोई शिकायत नहीं की है।
नब्बे एकड़ में फैले 206 बीडीडी चॉल हैं, जिनमें वर्ली में 120, एनएम जोशी मार्ग के पास 32, नायगांव में 42 और सेवरी में 12 चॉल शामिल हैं।
राज्य सरकार ने मुंबई पोर्ट ट्रस्ट की भूमि पर बनी सेवरी को छोड़कर सभी चालों के पुनर्विकास की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
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