देश की खबरें | हाथरस : कप्पन की गिरफ्तारी के खिलाफ पत्रकार संगठनों की याचिका पर चार सप्ताह बाद सुनवाई

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को कहा कि हाथरस जाते समय मथुरा मे केरल के पत्रकार की गिरफ्तारी के खिलाफ पत्रकारों के संगठन की याचिका पर चार सप्ताह बाद सुनवाई की जायेगी। यह पत्रकार उस दलित युवती के घर जा रहे थे जिसकी अगड़ी जाति के चार व्यक्तियों द्वारा कथित सामूहिक बलात्कार के बाद अस्पताल में मृत्यु हो गयी थी।

एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, 12 अक्टूबर उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को कहा कि हाथरस जाते समय मथुरा मे केरल के पत्रकार की गिरफ्तारी के खिलाफ पत्रकारों के संगठन की याचिका पर चार सप्ताह बाद सुनवाई की जायेगी। यह पत्रकार उस दलित युवती के घर जा रहे थे जिसकी अगड़ी जाति के चार व्यक्तियों द्वारा कथित सामूहिक बलात्कार के बाद अस्पताल में मृत्यु हो गयी थी।

प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबडे,न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना और न्यायमूर्ति वी रामासुब्रमणियन की पीठ ने केरल यूनियन ऑफ वर्किग जर्नलिस्ट्स से कहा कि वह याचिका में संशोधन करें। पीठ ने कहा कि इस संस्था को इलाहाबाद उच्च न्यायालय जाना चाहिए।

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केरल यूनियन ऑफ वर्किग जर्नलिस्ट्स ने पत्रकार सिद्दीकी कप्पन की गिरफ्तारी को लेकर न्यायालय में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की है।

इस संगठन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने पीठ से कहा कि इस मामले में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) कानून के तहत भी आरोप लगा दिये गये हैं और ऐसी स्थिति में अब राज्य में कोई भी अदालत उनके मुवक्किल को राहत नहीं देगी।

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पीठ ने जब यह कहा कि याचिकाकर्ता को राहत के लिये इलाहाबाद उच्च न्यायालय जाना चाहित तो सिब्बल ने कहा, ‘‘यूएपीए लगा दी गयी है। कोई भी अदालत अब मुझे सालों तक जमानत नहीं देगी। यह बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका है लेकिन हम संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत नयी याचिका भी दायर कर सकते हैं जिस पर न्यायालय विचार कर सकता है।’’

इस पर पीठ ने कहा कि बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका सिर्फ परिवार के सदस्य ही दायर कर सकते हैं।

सिब्बल ने याचिका में संशोधन करने की अनुमति चाही जिस पर न्यायालय ने इसे स्थगित कर दिया।

इस संगठन ने अपने साथी पत्रकार की गिरफ्तारी को गैरकानूनी और असंवैधानिक बताते हुये उसे तत्काल पेश करने और गैरकानूनी हिरासत से रिहा करने का अनुरोध किया है।

उत्तर प्रदेश पुलिस ने पांच अक्टूबर को कहा था कि उसने मथुरा में पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) और उससे संबद्ध संगठन से संबंध रखने वाले चार व्यक्तियों को गिरफ्तार किया है।

पीएफआई पर देश में संशोधित नागरिकता कानून के विरोध में हुये प्रदर्शनों का वित्तपोषण करने के भी आरोप लगे थे और उत्तर प्रदेश पुलिस ने इस संगठन पर प्रतिबंध लगाने का अनुरोध किया था।

पुलिस ने गिरफ्तार व्यक्तियों की पहचान मलप्पुरम के सिद्दीकी, मुजफ्फरनगर के अतीक-उर रहमान, बहराइच के मसूद अहमद और रामपुर के आलम के रूप में की थी।

गिरफ्तारी के कुछ ही घंटों के बाद, केरल के प्रमुख पत्रकार संगठन ने मलप्पुरम निवासी सिद्दीकी को उनके पूरे नाम सिद्दीकी कप्पन से पहचाना। साथ ही संगठन ने कहा कि वह "दिल्ली के एक वरिष्ठ पत्रकार" हैं।

हाथरस में पिछले महीने अगड़ी जाति के चार लोगों ने 19 साल की एक दलित युवती से कथित रूप से सामूहिक बलात्कार किया था। इस लड़की की बाद में दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में मृत्यु हो गयी थी।

अनूप

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