देश की खबरें | हाथरस मामला : प्रकरण की सुनवाई पर रोक से इनकार

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने हाथरस बलात्कार कांड मामले की सुनवाई स्थानीय विशेष अदालत (अनुसूचित जाति/ अनुसूचित जनजाति) में कराए जाने पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है।

लखनऊ, 29 अगस्त इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने हाथरस बलात्कार कांड मामले की सुनवाई स्थानीय विशेष अदालत (अनुसूचित जाति/ अनुसूचित जनजाति) में कराए जाने पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है।

हालांकि अदालत ने सीबीआई के लिए दरवाजे खुले रखे हैं कि अगर वह चाहे तो सुनवाई को दूसरी जगह स्थानांतरित करने के लिए अर्जी दे सकती है।

न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति जसप्रीत सिंह की पीठ ने यह आदेश हाल में एक जनहित याचिका पर पारित किया जो अदालत ने सितंबर 2020 में हाथरस कांड के फौरन बाद स्वत: संज्ञान लेते हुए दायर की थी।

इसके पूर्व, 19 मार्च 2021 को पारित आदेश के अनुपालन में हाथरस के जिला अधिकारी, एससी/एसटी अदालत के पीठासीन अधिकारी और सीआरपीएफ की तरफ से रिपोर्ट दाखिल की गई। यह रिपोर्ट पांच मार्च 2021 को हाथरस की अदालत में पीड़ित पक्ष के वकील को कथित तौर पर धमकी दिए जाने और अदालत में पीठासीन अधिकारी के लिए कथित रूप से परेशानी खड़ी किए जाने से संबंधित थी।

अदालत ने इन रिपोर्टों को रिकॉर्ड पर लेते हुए कहा कि उसे नहीं लगता कि हाथरस की विशेष अदालत में हो रही मामले की सुनवाई पर रोक लगाने या उसे कहीं और स्थानांतरित करने का कोई वाजिब कारण मौजूद है।

अदालत ने यह भी माना कि मामले की सुनवाई कहीं और स्थानांतरित करने का निवेदन इस प्रकरण की सुनवाई की पिछली तारीख के दिन पीड़ित पक्ष के वकील द्वारा मौखिक रूप से किया गया था। उसके लिए कोई लिखित अर्जी नहीं दी गई थी।

अदालत ने कहा कि अगर सीबीआई चाहे तो मामले की सुनवाई कहीं और कराने के लिए अर्जी दे सकती है।

दरअसल, अदालत ने सितंबर 2020 में हाथरस के चंदपा इलाके में एक लड़की की कथित बलात्कार के बाद इलाज के दौरान मौत के मामले में उसके शव को अमानवीय तरीके से जलाए जाने का स्वत: संज्ञान लिया था।

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)

Share Now

\