अहमदाबाद, 12 जुलाई अहमदाबाद की एक अदालत ने 2002 के गुजरात दंगे में निर्दोष लोगों को फंसाने के लिए सबूत गढ़ने की आरोपी सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ की ओर से आरोपों से बरी करने के अनुरोध वाली याचिका पर बुधवार को अपना आदेश 20 जुलाई तक के लिए सुरक्षित रख लिया।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अंबालाल पटेल ने दोनों पक्षों की दलीलें पूरी होने के बाद अपना आदेश सुरक्षित रख लिया।
सीतलवाड़, पूर्व पुलिस महानिदेशक आर बी श्रीकुमार और पूर्व आईपीएस अधिकारी संजीव भट्ट को पिछले साल जून में अपराध शाखा ने 2002 के दंगे के मामलों में सिलसिले में दोषसिद्धि के इरादे से फर्जी एवं जाली सबूत गढ़ने को लेकर गिरफ्तार किया था। बाद में सीतलवाड़ को जमानत मिल गयी थी।
गुजरात उच्च न्यायालय ने एक जुलाई को सीतलवाड़ की जमानत अर्जी खारिज कर दी थी और उन्हें तत्काल आत्मसमर्पण करने को कहा था। उच्च न्यायालय ने कहा था कि उन्होंने (सीतलवाड़ ने) लोकतांत्रिक ढंग से निर्वाचित तत्कालीन सरकार को अस्थिर करने और तत्कालीन मुख्यमंत्री एवं वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बदनाम करने की कोशिश की।
बाद में उच्चतम न्यायालय ने अंतरिम आदेश जारी कर उन्हें इस मामले में गिरफ्तारी से राहत प्रदान की।
इस मामले की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल के अनुसार सीतलवाड कांग्रेस नेता अहमद पटेल की ओर से मोदी के नेतृत्व वाली तत्कालीन भाजपा सरकार को अस्थिर करने की बड़ी साजिश का हिस्सा थीं।
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