नयी दिल्ली, 27 जुलाई वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) विभाग के अधिकारियों ने फर्जी बिल बनाने वाले दो गिरोहों का पर्दाफाश करते हुए इस मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार किया है।
ये गिरोह फर्जी तरीके से 557 करोड़ रुपये का इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) दावा करने में शामिल 246 मुखौटा/ फर्जी कंपनियों से जुड़े हैं।
वित्त मंत्रालय की ओर से जारी बयान के अनुसार, मामले में शामिल दो मुख्य साजिशकर्ताओं के लैपटॉप और मोबाइल फोन की जांच की जा रही है ताकि उनके द्वारा जारी किए गए फर्जी बहीखाता, चालान, ई-वे बिल आदि को वापस जुटाया जा सके। इसके अलावा, फर्जी जीएसटी बिल और अवैध नकदी प्रवाह के लेनदेन से जुड़ी व्हाट्सएप के चैट/ वॉयस संदेश भी मिले हैं।
मंत्रालय के अनुसार, प्रारंभिक जांच में फर्जी कंपनियों के नाम पर बैंक खाते खोलने में बैंक अधिकारियों की संलिप्तता भी सामने आई है।
बयान के अनुसार, ‘‘जीएसटी खुफिया महानिदेशालय (डीजीजीआई) की मेरठ क्षेत्रीय इकाई ने 246 मुखौटा/ फर्जी संस्थाओं से जुड़े फर्जी बिल बनाने वाले दो प्रमुख गिरोहा का खुलासा किया जिन्होंने 557 करोड़ रुपये की फर्जी आईटीसी जारी की है।’’
इन दोनों गिरोह ने 246 फर्जी कंपनियों के माध्यम से 1,500 से अधिक लाभार्थी कंपनियों को 3,142 करोड़ रुपये के कर-योग्य करोबार वाले चालान जारी किए हैं, जिसमें 557 करोड़ रुपये का आईटीसी शामिल है।
मामले में गिरफ्तार तीनों आरोपियों को 26 जुलाई को मेरठ की आर्थिक अपराध अदालत में पेश किया गया और उन्हें आठ अगस्त तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
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