जीएसटी ऑडिट दिशानिर्देशों की समीक्षा जरूरी, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग को शामिल करने की जरूरत: विशेषज्ञ
वस्तु और सेवा कर (जीएसटी) के मौजूदा ऑडिट दिशानिर्देशों के अनुसार करदाताओं को उनके वार्षिक कारोबार के आधार पर मोटेतौर पर तीन समूहों में बांटा गया है- बड़े, मध्यम और छोटे।
नयी दिल्ली, तीन मई विशेषज्ञों के मुताबिक जीएसटी अधिकारियों को कोरोना वायरस महामारी के कारण सीधे जाने के बजाए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए करदाताओं का ऑडिट तथा आकलन करना होगा, और इसके लिए मौजूदा दिशानिर्देशों की समीक्षा करने की जरूरत है।
वस्तु और सेवा कर (जीएसटी) के मौजूदा ऑडिट दिशानिर्देशों के अनुसार करदाताओं को उनके वार्षिक कारोबार के आधार पर मोटेतौर पर तीन समूहों में बांटा गया है- बड़े, मध्यम और छोटे।
मौजूदा दिशानिर्देशों के तहत बड़ी और मध्यम इकाइयों का परिसर आधारित ऑडिट अनिवार्य है, जबकि छोटी इकाइयों के लिए डेस्क आधारित ऑडिट का सुझाव दिया गया है।
पिछले महीने केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सुविधा के जरिए अधिकारियों से सुनवाई करने के लिए कहा था।
पीडब्ल्यूसी इंडिया के प्रतीक जैन ने कहा कि 2017-18 के लिए जीएसटी ऑडिट और आकलन जल्द शुरू होगा और विभाग को ऑडिट दिशानिर्देशों की समीक्षा करनी होगी।
जैन ने कहा, ‘‘मौजूदा दिशानिर्देश बड़े व्यवसाय के परिसर में 7-8 दिनों के लिए प्रत्यक्ष ऑडिट की बात करते हैं। चूंकि सामाजिक दूरी अब आम बात हो गई है, इसलिए जीएसटी अधिकारियों को भी अधिक आभासी सत्यापन की संभावनाएं तलाशनी होंगी।’’
उन्होंने कहा कि सरकार को अपनी जोखिम प्रबंधन प्रणाली पर फिर से विचार करना होगा और करदाताओं के आकलन के बेहतर तरीके विकसित करने होंगे।
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