देश की खबरें | सरकारी योजनाएं अब वोट आधारित नहीं, ‘सभी का विकास’ एक मात्र आधार : मोदी

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. मनाली को लाहौल-स्पीति घाटी से जोड़ने वाली 9.02 किलोमीटर लंबी अटल सुरंग को इसका उत्कृष्ट उदाहरण बताते हुए उन्होंने कहा कि उनकी सरकार पूर्व की सरकारों की तरह राजनीतिक स्वार्थ की सिद्धि के हिसाब से योजनाएं तय नहीं करती।

एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

मनाली को लाहौल-स्पीति घाटी से जोड़ने वाली 9.02 किलोमीटर लंबी अटल सुरंग को इसका उत्कृष्ट उदाहरण बताते हुए उन्होंने कहा कि उनकी सरकार पूर्व की सरकारों की तरह राजनीतिक स्वार्थ की सिद्धि के हिसाब से योजनाएं तय नहीं करती।

प्रधानमंत्री ने अटल सुरंग का फीता काटकर उद्घाटन के बाद यहां के सिस्सू गांव में आयोजित एक जनसभा को संबोधित करते हुए ये बातें कहीं। कोरोना महामारी के दौर में प्रधानमंत्री की यह पहली रैली थी जिसमें वह खुद शामिल हुए और मंच से भाषण दिया।

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देश में जब से कोरोना महामारी फैली है, प्रधानमंत्री डिजिटल माध्यमों का उपयोग कर ही जनसभाओं और सरकारी कार्यक्रमों को संबोधित करते रहे हैं।

मोदी ने कहा, ‘‘अब देश में नई सोच के साथ काम हो रहा है। सबके साथ से, सबके विश्वास से, सबका विकास हो रहा है। अब योजनाएं इस आधार पर नहीं बनतीं कि कहां कितने वोट हैं। अब प्रयास इस बात का है कि कोई भारतीय छूट ना जाए, पीछे न रह जाए। इस बदलाव का एक बहुत बड़ा उदाहरण लाहौल-स्पीति है।’’

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उन्होंने कहा कि अटल सुरंग केंद्र सरकार के उस संकल्प का हिस्सा है कि देश के हर हिस्से में, हर व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचना चाहिए।

उन्होंने लोगों को पुराने दिन याद दिलाते हुए कहा, ‘‘लाहौल स्पीति जैसे देश के अनेक हिस्से ऐसे थे जिन्हें अनेक समस्याओं के साथ संघर्ष करने के लिए उनके नसीब पर छोड़ दिया गया था। क्योंकि ऐसे क्षेत्र कुछ लोगों के राजनीतिक स्वार्थ को सिद्ध नहीं करते थे।’’

केंद्र सरकार द्वारा घर-घर बिजली, पानी, गैस और शौचायल की व्यवस्था किए जाने के अपनी सरकार के संकल्प की विस्तृत जानकारी देते हुए उन्होंने जनसभा में मौजूद लोगों को बताया कि कैसे उनकी सरकार लोगों का जीवन आसान बनाने की दिशा में लगातार प्रयास कर रही है।

उन्होंने कहा कि अटल सुरंग के बन जाने से स्पीति घाटी में स्थित देश में बौद्ध शिक्षा के एक अहम केंद्र ताबो मठ तक दुनिया की पहुंच और सुगम होने वाली है।

उन्होंने कहा, ‘‘एक प्रकार से ये पूरा इलाका पूर्वी एशिया समेत विश्व के अनेक देशों के बौद्ध अनुयायियों के लिए भी एक बड़ा केंद्र बनने वाला है।’’

उन्होंने कहा इतना ही नहीं इससे पूरे क्षेत्र के युवाओं को रोज़गार, खेती, बागवानी व पशुपालन से जुड़े लोगों और नौकरीपेशा, व्यापारी व कारोबारियों को अनेक अवसर उपलब्ध होंगे और लाभ मिलेगा।

उन्होंने कहा, ‘‘अब लाहौल के किसानों की गोभी, आलू और मटर की फसल बर्बाद नहीं होगी बल्कि तेज़ी से बाजार पहुंचेगी।’’

प्रधानमंत्री ने कहा कि अटल सुरंग के न होने से क्षेत्र के लोगों को वर्षों तक जो दर्द और पीड़ा उठानी पड़ी, वह मुश्किल दौर अब उनके बच्चों को नहीं देखना पड़ेगा।

उन्होंने कहा, ‘‘अटल सुरंग के बन जाने से लाहौल के लोगों के लिए नई सुबह हुई है। 45-46 किलोमीटर की दूरी सीधे कम हो गई। कभी कल्पना भी नहीं की होगी लोगों ने कि उनके जीवनकाल में यह सुविधा उन्हें मिलेगी।’’

उन्होंने कहा कि अब लाहौल स्पीति क्षेत्र के औषधीय पौधे और अनेक प्रकार के मसालें देश ही नहीं पूरी दुनिया में पहचान बन सकते हैं। इस पूरे क्षेत्र में पर्यटन को लेकर अपार संभावनाएं हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘प्रकृति की असीम कृपा है यहां। आध्यात्म और आस्था से जुड़े पर्यटन के लिए अद्भुत संभावना है। अब इस पूरे क्षेत्र को नया आयाम मिलने वाला है।’’

इस अवसर पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि अटल सुरंग जहां विश्व की सबसे बड़ी सुरंग है वहीं यह भारत माता के मुकुट का अनमोल रत्न भी है।

उन्होंने कहा कि रक्षा ही नहीं कला, साहित्य के अलावा राजनीति के क्षेत्र में हिमाचल प्रदेश का बहुत बड़ा योगदान है।

अटल सुरंग के सामरिक महत्व को बताते हुए उन्होंने कहा कि यह इलाका अब चौबीसों घंटे भारत के अन्य हिस्सों से जुड़ गया है।

उन्होंने कहा, ‘‘अब हिमाचल का यह क्षेत्र पूरी ताकत के साथ देश के विकास में भागीदार बन सकेगा। पर्यटन तेजी से बढ़ेगा, इसमें कोई दो मत नहीं है। किसानों और बागवानी करने वालों की आमदनी बढ़ेगी। अब राशन जमा करते रखने की जरूरत नहीं पड़ेगी। जब चाहेंगे तब सेना के जवानों के लिए राशन, हथियार और अन्य साजों सामना पहुंचाया जा सकेगा।’’

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