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सरकार ने जनजातीय इलाकों के वन उत्पादों का न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाया

एक सरकारी वक्तव्य में यह जानकारी देते हुये कहा गया है कि गौण वन उत्पादों के एमएसपी में हर तीन साल में एक बार समीक्षा की जाती है। जनजातीय मामलों के मंत्रालय द्वारा गठित मूल्यांकन प्रकोष्ठ यह समीक्षा करता है।

सरकार ने जनजातीय इलाकों के वन उत्पादों का न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाया
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नयी दिल्ली, एक मई सरकार ने शुक्रवार को देश के जनजातीय इलाकों में तैयार किये जाने वाले गौण वन उत्पादों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में संशोधन कर दिया। इससे कोरोना वायरस महामारी से उत्पन्न कठिन परिस्थितियों के बीच जनजातीय उत्पादों को जरूरी समर्थन देने में मदद मिलेगी।

एक सरकारी वक्तव्य में यह जानकारी देते हुये कहा गया है कि गौण वन उत्पादों के एमएसपी में हर तीन साल में एक बार समीक्षा की जाती है। जनजातीय मामलों के मंत्रालय द्वारा गठित मूल्यांकन प्रकोष्ठ यह समीक्षा करता है।

इसमें कहा गया है कि सक्षम प्राधिकरण ने इस मामले में केन्द्रीय प्रायोजित इस योजना के मौजूदा प्रावधान में राहत देते हुये योजना के तहत आने वाले 49 गौण वन उत्पादों के एमएसपी में संशोधन किया है।

इसमें कहा गया है, ‘‘कोविड- 19 महामारी के कारण देश में वर्तमान में व्याप्त अप्रत्याशित और बहुत कठिन परिस्थितियों को देखते हुये जनजातीय वन उत्पादों के संग्रहकताओं को जरूरी समर्थन देने के लिये यह कदम उठाया गया है।।’’

वक्तव्य में कहा गया है, एमएसपी में 16 से लेकर 66 प्रतिशत की वृद्धि से कम से कम देश के 20 राज्यों में छोटे और गौण जनजातीय उत्पादों की खरीद को समर्थन मिलेगा और तुरंत राहत पहुंच सकेगी।

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(The above story first appeared on LatestLY on May 01, 2020 11:52 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).