देश की खबरें | 1964 में चक्रवात से तबाह हुए धनुषकोडि रेलवे स्टेशन के पुनर्निर्माण के लिए सरकार ने बनाई मसौदा योजना

धनुषकोडि (तमिलनाडु), एक जून तमिलनाडु स्थित धनुषकोडि रेलवे स्टेशन की हालत को देखकर 73 वर्षीय पुरुषोत्तम की आंखों में उम्मीद और असुरक्षा की मिश्रित भावनाएं उमड़ती हैं। उन्हें 23 दिसंबर 1964 को आए शक्तिशाली चक्रवात की याद आती है जो इस तटीय इलाके में मौत और बर्बादी का सैलाब लेकर आया था।

इन सबके बीच पुरुषोत्तम सुरक्षित उस स्टेशन तक पहुंचने में कामयाब हुए थे जिसके खंभे तेज हवाओं के बीच भी तन कर खड़े थे। चक्रवात के कारण रामेश्वरम-धनुषकोडि रेल पटरी और अन्य संरचनाएं उखड़ गईं थी और सौ से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी।

भारत में मंडपम और मात्र 18 किलोमीटर दूर, श्रीलंका के कोलंबो के बीच समुद्र मार्ग के जरिये चलने वाली एकमात्र ट्रेन सेवा भी बंद हो गई थी। इसके बाद जो क्षेत्र विकसित हुआ वह पुरुषोत्तम और 300 अन्य परिवारों का घर है अलबत्ता वहां बिजली और अन्य सार्वजनिक सुविधाएं उपलब्ध नहीं थी।

रेलवे मंत्रालय ने 50 साल बाद धनुषकोडि रेलवे स्टेशन और नष्ट हुई अवसंरचना के पुनर्निर्माण के प्रस्ताव का मसौदा तैयार किया है। रेलवे स्टेशन के पुनर्निर्माण के लिए पुरुषोत्तम और अन्य परिवारों का स्थानांतरण किया जाएगा। मसौदा योजना के तहत अभी वे जहां रह रहे हैं वह स्थान नए धनुषकोडि रेलवे स्टेशन का यार्ड होगा जो कि पंबन द्वीप पर स्थित है और पाक जलसंधि द्वारा मुख्य भूमि से कटा हुआ है।

चक्रवात की विभीषिका के समय पुरुषोत्तम केवल 15 साल के थे और अब वे एक मंदिर के पुजारी हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें प्रस्तावित योजना से कोई समस्या नहीं है बल्कि उन्हें इस बात का डर है कि सरकार मसौदे को वास्तविकता के धरातल पर उतार पाएगी या नहीं।

उन्होंने कहा, “मैं यह भी झेल सकता हूं। मैंने लाशों के समुद्र को पार किया था। उस समय इस बड़ी इमारत ने हमें आश्रय दिया था जबकि वह भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त जो गई थी। वह भयानक दिन थे।”

उन्होंने कहा, “मैं अधिकारियों को यहां आते-जाते और जमीन पर निशान लगाते देखता हूं। मगर मेरा घर और मंदिर इस क्षेत्र में नहीं है। मुझे लगता है कि धनुषकोडि एक कस्बा है जिसे देश के अन्य भागों से जोड़ा जाना चाहिए क्योंकि यह सांस्कृतिक रूप से अहम है। इसका धार्मिक महत्व भी है।”

उन्होंने कहा, “मैं चक्रवात से बच गया, बिना बिजली के रहा, मैं यहाँ भी झेल सकता हूं।” चक्रवात के समय चार वर्ष की रही काली अम्मा को अब वह दिन ठीक से याद नहीं लेकिन उन्हें श्रीलंकाई शरणार्थियों के अपने परिवार की बातें याद हैं जो वह चक्रवात के कारण आई बर्बादी के बारे में करते थे।

उन्होंने कहा, “दशकों में यहां बिजली और अन्य मूलभूत सुविधाएं नहीं आई, वे रेलवे लाइन कैसे लाएंगे?” मंजूरी का इंतजार करते रेलवे के प्रस्ताव के अनुसार, रामेश्वरम और धनुषकोडि के बीच 18 किलोमीटर लंबी लाइन बनाई जाएगी जिसमें से पांच किलोमीटर जमीन के स्तर पर होगी तथा बाकि उसके ऊपर।

एकल लाइन में बिजली दौड़ेगी और उसे ब्रॉड गेज से जोड़ा जाएगा। दक्षिण रेलवे द्वारा तैयार की गई सर्वेक्षण रिपोर्ट में नौ सौ मीटर लम्बे और 80 मीटर चौड़े रेलवे स्टेशन का खाका तैयार किया है जिसकी लागत 733 करोड़ रुपये आंकी गई है।

रेलवे लाइन के लिए जमीन का अधिग्रहण किया जाना है। मदुरै डिवीजन के सहायक कार्यकारी अभियंता आनंद ने कहा कि एक बार सभी प्रकार की मंजूरी मिल जाए और भूमि का अधिग्रहण हो जाए तो दो साल में स्टेशन बनकर तैयार हो जाएगा।

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