जरुरी जानकारी | सरकार रेपो दर में कटौती का लाभ बैंकों से ग्राहकों को मिलने पर रखे हुये है नजर: वित्त मंत्री

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नयी दिल्ली, 19 जून वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को कहा कि सरकार कोविड-19 से प्रभावित अर्थव्यवस्था को गति देने के लिये घोषित विभिन्न राहत उपायों खासकर रेपा दर में कटौती का लाभ बैंकों से कंपनियों और ग्राहकों को मिलने पर नजर रखे हुये है।

वीडियो कांफ्रेन्सिंग के जरिये उद्योग मंडल पीएचडी चैंबर ऑफ कामर्स की प्रबंधन समिति के सदस्यों के साथ बातचीत में उन्होंने कहा कि सरकार ने हमेशा संपत्ति सृजित करने वालों के महत्व को पहचाना है क्योंकि देश में सामाजिक आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिये वे रोजगार अवसर भी सृजित करते हैं और अनुकूलतम तरीके से संसाधनों का उपयोग करते हैं।

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मंत्रालय के आधिकारिक बयान में वित्त मंत्री के हवाले से कहा गया है, ‘‘हम बैंकों के साथ विचार-विमर्श कर स्थिति पर नजर रखे हुए हैं ताकि सरकार ने जिन राहत उपयों की घोषणा की है, वह जमीनी स्तर पर क्रियान्वित हो। रेपो दर में कटौती का लाभ ग्राहकों को ब्याज दरों में कमी के रूप में मिलने पर खास तौर पर नजर है।’’

पिछले महीने आरबीआई ने नीतिगत दर रेपो में 0.40 प्रतिशत की कटौती की। इसके बाद रेपो दर 4 प्रतिशत के ऐतिहासिक न्यूनतम स्तर पर आ गयी। रेपो दर वह दर है जिस पर बैंक, केंद्रीय बैंक से अल्पावधि के लिये कर्ज लेते हैं।

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आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा था कि मौद्रक नीति में कटौती से बैंकों की ब्याज दरों में निरंतर सुधार हुआ है।

उन्होंने कहा था, ‘‘एक साल के कोष की सीमांत लागत आधारित ब्याज दर (एमसीएलआर) फरवरी 2019 से 15 मई 2020 के दौरान औसतन 0.90 प्रतिशत कम हुई है.... इसी प्रकार रुपये के नये कर्ज पर भारित औसत ब्याज दर (डब्ल्यएएलआर) फरवरी 2019 के बाद से 1.14 प्रतिशत कम हुई है। इसमें भी 0.43 प्रतिशत कमी अकेले मार्च 2020 में आई है।’’

वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार ने कोविड-19 संकट के प्रभाव को कम करने के लिये कंपनियों को 3 लाख करोड़ रुपये तक कर्ज बिना गारंटी देने की घोषणा की है। इसके तहत ऋण वितरण पर नजर रखी जा रही है।

उन्होंने कहा कि सरकार न्यूनतम सरकार, कारगर प्रशासन के मकसद के साथ आगे बढ़ रही है। इसमें उद्योग के समक्ष चुनौतियों को दूर करने और कारोबार सुगमता बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।

पीएचडी चैंबर ऑफ कामर्स ने 20.97 लाख करेाड़ रुपये के राहत पैकेज को व्यापक और अच्छा बताया। उद्योग मंडल ने कहा कि पैकेज में न केवल मौद्रिक और वित्तीय प्रोत्साहन है बल्कि पासा पलटने वाले सुधार भी हैं जो भारत को नई ऊंचाई पर ले जाएंगे।

उद्योग मंडल ने कहा कि पर्यटन, विमानन, मनोरंजन, रीयल एस्टेट और वाहन समेत कुछ क्षेत्र कोविड-19 महामारी और ‘लॉकडाउन’ से सर्वाधिक प्रभावित हुए हैं। उसने इनके लिये एक बारगी ऋण पुनर्गठन की मांग की। उसने कहा कि यह समय की जरूरत है।

बैठक में वित्त मंत्री के अलावा राजस्व सचिव अजय भूषण पांडे, वित्तीय सेवा सचिव देबाशीष पांडा, कॉरपोरेट मामलों के सचिव राजेश वर्मा और मुख्य आर्थिक सलाहकार कृष्णमूर्ति सुब्रमणियम भी मौजूद थे।

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