ताजा खबरें | सरकार ने नगालैंड की घटना पर खेद जताया, मामले की जांच के लिये एसआईटी गठित

Get latest articles and stories on Latest News at LatestLY. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने नगालैंड में सुरक्षा बलों की कथित गोलीबारी 14 लोगों की मौत की घटना पर खेद प्रकट करते हुए सोमवार को कहा कि इसकी विस्तृत जांच के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया है तथा सभी एजेंसियों से यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि भविष्य में ऐसे किसी घटना की पुनरावृत्ति ना हो।

नयी दिल्ली, छह दिसंबर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने नगालैंड में सुरक्षा बलों की कथित गोलीबारी 14 लोगों की मौत की घटना पर खेद प्रकट करते हुए सोमवार को कहा कि इसकी विस्तृत जांच के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया है तथा सभी एजेंसियों से यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि भविष्य में ऐसे किसी घटना की पुनरावृत्ति ना हो।

नगालैंड की घटना पर पहले लोकसभा में और फिर राज्यसभा में अपने बयान में शाह ने कहा, ‘‘भारत सरकार नगालैंड की घटना पर अत्यंत खेद प्रकट करती है और मृतकों के परिवारों के प्रति गहरी संवेदना जताती है।’’

उन्होंने कहा कि नगालैंड की घटना की विस्तृत जांच के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया है जिसे एक महीने के अंदर जांच पूरी करनी है।

गृह मंत्री ने कहा, ‘‘सभी एजेंसियों से यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि भविष्य में विद्रोहियों के खिलाफ अभियान चलाते समय इस तरह की किसी घटना की दुर्भाग्यपूर्ण पुनरावृत्ति नहीं हो।’’

उन्होंने कहा, ‘‘सरकार स्थिति पर सूक्ष्मता से नजर रख रही है।’’

शाह ने कहा कि सेना द्वारा इन ‘दुर्भाग्यपूर्ण’ मृत्यु के कारणों की जांच उच्चतम स्तर पर की जा रही है और कानून के अनुसार समुचित कार्रवाई की जाएगी।

उन्होंने कहा कि एहतियात के तौर पर राज्य के अधिकारियों ने इलाकों में निषेधाज्ञा लागू की है।

शाह ने घटना का ब्यौरा देते हुए कहा कि 4 दिसंबर को नगालैंड के मौन जिले में भारतीय सेना को उग्रवादियों की आवाजाही की सूचना मिली और उसके 21वें पैरा कमांडो ने इनका इंतजार किया।

उन्होंने कहा कि शाम को एक वाहन उस स्थान पर पहुंचा और सशस्त्र बलों ने उसे रोकने का संकेत दिया लेकिन वह नहीं रूका और आगे निकलने लगा। शाह ने कहा कि इस वाहन में ‘विद्रोहियों’ के होने के संदेह में इस पर गोलियां चलायी गयीं जिसमें वाहन पर सवार आठ में से छह लोग मारे गए।

शाह ने कहा कि बाद में इसे गलत पहचान का मामला पाया गया। सेना इस घटना में घायल दो लोगों को पास के चिकित्सा केंद्र ले गई।

गृह मंत्री ने बताया कि स्थानीय ग्रामीणों ने सेना की बटालियन को घेर लिया, दो वाहनों में आग लगा दी गयी और उन पर हमला किया जिसमें एक सैनिक की जान चली गई और कुछ अन्य घायल हो गए।

उन्होंने कहा, ‘‘अपनी सुरक्षा में एवं भीड़ को तितर-बितर करने के लिये सुरक्षा बल को गोली चलानी पड़ी और इसमें सात अन्य लोग मारे गए।

शाह ने कहा कि स्थिति तनावपूर्ण लेकिन नियंत्रण में है।

उन्होंने कहा कि 5 दिसंबर को 250 लोगों की भीड़ ने असम राइफल्स के भवन पर हमला किया और इस दौरान संघर्ष में एक व्यक्ति की मौत हो गई।

गृह मंत्री ने कहा कि सेना ने भी एक विज्ञप्ति जारी करके कहा है कि उन्हें इस घटना पर काफी दुख है और ऐसी दुर्भाग्यपूर्ण घटना की सेना द्वारा उच्च स्तरीय जांच की जा रही है।

शाह ने कहा कि उन्होंने राज्य के राज्यपाल और मुख्यमंत्री से बात की है और सामान्य स्थिति बहाल करने के प्रयास जारी हैं।

शाह के बयान से असंतोष जताते हुए कांग्रेस, द्रमुक और कुछ अन्य विपक्षी दलों ने जहां लोकसभा से बहिर्गमन किया वहीं राज्यसभा में उनके बयान के दौरान विपक्षी सदस्य 12 निलंबित सदस्यों का निलंबन रद्द करने की मांग को लेकर हंगामा करते रहे।

बाद में उपसभापति हरिवंश ने सदस्यों से स्पष्टीकरण पूछने के लिए कहा और इसके लिए उन्होंने राष्ट्रीय जनता दल के मनोज कुमार झा का नाम पुकारा।

उन्होंने कहा ‘‘आपने स्वयं स्पष्टीकरण पूछने के लिए नाम दिया था। आप स्पष्टीकरण पूछिए।’’

बहरहाल, हंगामा थमते न देख उप सभापति ने चार बज कर करीब दस मिनट पर बैठक दिन भर के लिए स्थगित कर दी।

इससे पहले विपक्षी दलों ने दोनों सदनों में नगालैंड में सुरक्षा बलों की गोलीबारी का मुद्दा उठाया तथा इस घटना की उच्च स्तरीय जांच कराने, मृतकों के परिजनों को पर्याप्त मुआवजा देने तथा गृह मंत्री से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की थी

ब्रजेन्द्र

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