देश की खबरें | सरकार ने मीडिया काउंसिल को जरूरी नहीं बताया, समिति ने ऐसे ढांचा पर दिया जोर

नयी दिल्ली, नौ फरवरी सरकार ने संसद की एक समिति को बताया कि एकीकृत मीडिया काउंसिल के गठन की जरूरत नहीं है क्योंकि अलग अलग प्लेटफार्म अपने आप में विशिष्ठ होते हैं और उनके लिये स्व विनियमन तंत्र मौजूद है।

हालांकि, समिति ने विधिक शक्तियों के साथ ऐसा ढांचा तैयार करने की जरूरत बतायी है।

शिवसेना सांसद प्रताप जाधव की अध्यक्षता वाली संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की समिति ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को मीडिया काउंसिल के गठन का सुझाव दिया, यह रिपोर्ट संसद में बृहस्पतिवार को पेश की गई थी।

इसमें कहा गया है कि समिति ने कहा कि प्रेस काउंसिल आफ इंडिया और न्यूज ब्राडकास्टिंग स्टैंडर्ड अथोरिटी द्वारा जारी परामर्शो के अनुपालन की सीमाएं हैं।

समिति द्वारा पेश की गई कार्रवाई रिपोर्ट में कहा गया है कि मंत्रालय को मीडिया काउंसिल के गठन की संभावना तलाशनी चाहिए जिसमें प्रिंट, इलेक्ट्रानिक और डिजिटल मीडिया शामिल हो।

वहीं, सरकार ने समिति को बताया कि अलग अलग प्लेटफार्म अपने आप में विशिष्ट होते हैं और उनके लिये स्व विनियमन तंत्र मौजूद हैं, ऐसे में एकीकृत विनियामक ढांचा तैयार करने की जरूरत नहीं है।

समिति का कहना है कि निजी टीवी समाचार और गैर समाचार चैनल विनियमन की प्रणाली द्वारा शासित होते हैं । समाचार और समसामयिक मामलों के टीवी चैनलों की प्रतिनिधि संस्था न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन (एनबीए) ने ऐसी ही एक प्रणाली विकसित की है।

इसमें कहा गया है कि एनबीए समाचार प्रसारण मानक प्राधिकरण की स्थापना की है जिसे प्रसारक को चेतावनी देने, निंदा करने और जुर्माना लगाने या संहिता के उल्लंघन के लिए ऐसे प्रसारक के लाइसेंस को निलंबित या निरस्त करने के लिए संबंधित प्राधिकरण को सिफारिश करने का अधिकार है।

इसके अलावा इंडियन ब्रॉडकास्टिंग फाउंडेशन (आईबीएफ) गैर समाचार और समसामयिक मामलों के टीवी चैनलों की एक प्रतिनिधि निकाय है। इसमें शिकायतों की जांच और समाधान के लिए प्रसारण सामग्री शिकायत परिषद (बीसीसीसी) की स्थापना की है।

इसी तरह एडवरटाइजिंग स्टैंडर्स काउंसिल ऑफ इंडिया एक अन्य विनियामक स्वैच्छिक संगठन है जिसने विज्ञापनों के संबंध में शिकायतों पर विचार करने के लिए उपभोक्ता शिकायत परिषद का गठन किया है।

जैसा कि सूचना प्रसारण मंत्रालय की ओर से सूचित किया गया है कि सभी 926 निजी सेटेलाइट टेलीविजन चैनल के सदस्य नहीं हैं। इसलिए उन चैनलों के विरुद्ध शिकायत उचित कार्रवाई के लिए मंत्रालय को भेज दी जाती है।

समिति ने यह भी नोट किया कि पिछले 5 वर्षों में अर्थात 2015 से 2019 के दौरान यद्यपि कार्यक्रम और विज्ञापनों के उल्लंघन के 141 मामलों में कार्रवाई की गई, उनमें से 119 मामले उनसे संबंधित है जो आईबीएफ के सदस्य नहीं है।

समिति ने संतोष जताया कि विनियामक निकाय इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए काफी अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं।

दीपक

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