नयी दिल्ली, 20 जून सरकार ने शनिवार को कहा कि उसने मेक इन इंडिया नीति का लाभ उठाने के लिये वैश्विक पोत मालिकों को भारत में अपने जहाजों को पंजीकृत कराने के लिये आमंत्रित किया है।
सरकार ने हाल ही में सार्वजनिक खरीद के लिये अपनी मेक इन इंडिया नीति को संशोधित किया है, जिसके तहत 200 करोड़ रुपये से कम के अनुमानित मूल्य वाले सभी सेवाओं की खरीद के लिये सक्षम प्राधिकार की मंजूरी के अलावा कोई वैश्विक निविदा जारी नहीं की जायेगी।
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नौवहन मंत्रालय ने एक बयान में कहा, "यह अनुमान है कि मेक इन इंडिया नीति तत्काल अवधि में भारतीय ध्वज वाले जहाजों (भारत में पंजीकृत जहाजों) की संख्या को कम से कम दोगुना करने का अवसर प्रदान करेगी। अभी ऐसे जहाजों की संख्या लगभग 450 है, जो इस नीति के दम पर तीन साल की अवधि में कम से कम 900 पर पहुंच सकती है। इससे भारत में पंजीकृत जहाजों की ढुलाई की क्षमता में अतिरिक्त निवेश की संभावनाएं खुलेंगी।’’
बयान के अनुसार, आधुनिक समुद्री व्यवस्था के साथ, प्रशिक्षित समुद्री यात्रियों की निरंतर आपूर्ति और जहाज प्रबंधन कौशल पहले से ही उपलब्ध हैं। ऐसे में दुनिया भर के जहाज मालिकों को सरकारी माल के परिवहन के संबंध में मेक इन इंडिया नीति का लाभ लेने के लिये अब भारत में अपने जहाजों को पंजीकृत करने के लिये आमंत्रित किया जाता है।
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बयान में कहा गया कि नौवहन मंत्री मनसुख मंडाविया ने सरकार की कार्गो परिवहन नीति के कार्यान्वयन के लिए भारतीय नौवहन की तैयारियों की समीक्षा की है।
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