जरुरी जानकारी | अर्थव्यवस्था को पुन: वृद्धि के रास्ते पर लाने के लिए परियोजनाओं पर काम तेज करे सरकार: पीएचडी मंडल

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. पीएचडी वाणिज्य एवं उद्योग मंडल के नव-निर्वाचित अध्यक्ष संजय अग्रवाल ने कहा है कि अर्थव्यवस्था को जल्द वृद्धि के रास्ते पर लाने के लिये सरकार को बड़ी ढांचागत परियोजनाओं पर काम तेज करना चाहिये। इससे निजी निवेश और रोजगार सृजन भी तेज होगा।

नयी दिल्ली, 10 अक्ट्रबर पीएचडी वाणिज्य एवं उद्योग मंडल के नव-निर्वाचित अध्यक्ष संजय अग्रवाल ने कहा है कि अर्थव्यवस्था को जल्द वृद्धि के रास्ते पर लाने के लिये सरकार को बड़ी ढांचागत परियोजनाओं पर काम तेज करना चाहिये। इससे निजी निवेश और रोजगार सृजन भी तेज होगा।

अग्रवाल ने कहा कि सरकार ने 102 लाख करोड़ रुपये की विभिन्न बड़ी परियोजनाओं की पाइपलाइन बना रखी है। इन परियोजनाओं पर तेजी से अमल किया जाना चाहिये। इससे अर्थव्यवस्था में मांग बढ़ेगी, निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा और साथ ही रोजगार के अवसर भी बढेंगे। अग्रवाल ने पीएचडी उद्योग-मंडल की हाल ही में संपन्न 115वीं वार्षिक आम बैठक में अध्यक्ष पद संभाला।

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अग्रवाल ने कहा कि कोरोना वायरस महामारी के कारण लगाये गये लॉकडाउन की वजह से होटल, रेस्त्रां, टूरिस्ट आपरेटर सहित पूरा पर्यटन और विमानन क्षेत्र बुरी तरह प्रभावित हुआ है। इन क्षेत्रों में लोग बड़ी संख्या में बेरोजगार हुये हैं। दूसरे क्षेत्रों में भी गतिविधियां अभी इतनी तेज नहीं हुई हैं कि इन लोगों को दूसरे क्षेत्रों में रोजगार मिल सके। इसलिये सरकार को चाहिये की ढांचागत परियोजनाओं पर जोरशोर से अमल किया जाये।

उल्लेखनीय है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पिछले साल दिसंबर में 102 लाख करोड़ रुपये की परियोजनाओं की पाइपलाइन की घोषणा की थी। उन्होंने कहा था कि इन परियोजनाओं के अमल में आने से देश को 2025 तक 5,000 अरब डालर की अर्थव्यवस्था बनाने में मदद मिलेगी। इनमें बिजली, रेलवे, शहरी विकास, सिंचाई, शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र की परियोजनायें शामिल हैं।

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इनमें 39 प्रतिशत केन्द्रीय क्षेत्र की, 39 प्रतिशत राज्यों की और 22 प्रतिशत निजी क्षेत्र की परियोजनायें शामिल हैं।

पैरामांउट केबल्स ग्रुप के चेयरमैन एवं सीईओ संजय अग्रवाल ने कहा कि चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में अर्थव्यवस्था को गहरा झटका लगा है। लेकिन सितंबर के महीने से गतिविधियां कुछ सामान्य स्थिति की तरफ लौटती दिख रहीं हैं। विनिर्माण क्षेत्र का सितंबर माह का पर्चेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (पीएमआई) 56.4 अंक पर पहुंच गया। सेवा क्षेत्र के पीएमआई में भी कई महीनों के बाद सुधार आया है। सितंबर माह में जीएसटी प्राप्ति भी 95 हजार करोड़ रुपये से अधिक रही है। निर्यात में लगातार गिरावट के बाद पहली बार वृद्धि दर्ज की गई। डिजिटल तरीके से भुगतान बढ़ा है। ‘‘इस स्थिति को देखते हुये हम कह सकते हैं कि बुरा दौर पीछे निकल चुका है।’’

अग्रवाल ने कहा कि उन्हें लगता है कि अर्थव्यवस्था की वृद्धि तीसरी या चौथी तिमाही (अक्टूबर से लेकर मार्च के बीच) पुन: वृद्धि की राह पर आ सकती है।पहली तिमाही में जीडीपी में 23.9 प्रतिशत की बड़ी गिरावट आई है।

उन्होंने कहा तीसरी और चौथी तिमाही में यदि सब कुछ ठीक ठाक रहा तो पूरे वित्त वर्ष के दौरान अर्थव्यवस्था में बड़ी गिरावट नहीं होगी। अर्थव्यवस्था में वृद्धि नहीं तो कोई बड़ी गिरावट भी नहीं होगी।

हालांकि, रिजर्व बैंक के गवर्नर ने चालू वित्त वर्ष के दौरान देश की अर्थव्यवस्था में 9.5 प्रतिशत गिरावट आने का अनुमान व्यक्त किया है। नौ अक्टूबर को जारी आरबीआई की मौद्रिक नीति समीक्षा के मुताबिक पहली तिमाही में 23.9 प्रतिशत की गिरावट के बाद दूसरी तिमाही (जुलाई से सितंबर 2020) में 9.8 प्रतिशत, तीसरी तिमाही (अक्टूबर- दिसंबर 2020) में 5.6 प्रतिशत की गिरावट आने का अनुमान है जबकि चौथी तिमाही (जनवरी से मार्च 2021) की अवधि में 0.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की जा सकती है।

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