देश की खबरें | ‘गूगल-पे को रिजर्व बैंक की अनुमति की जरूरत नहीं क्योंकि यह भुगतान प्रणाली संचालक नहीं है’

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. गूगल इंडिया डिजिटल प्राइवेट लिमिटेड ने दिल्ली उच्च न्यायालय से कहा है कि गूगल-पे ऐप को भारतीय रिजर्व बैंक से अनुमति की आवश्यकता नहीं है क्योंकि यह भुगतान प्रणाली संचालक (पीएसओ) नहीं, बल्कि यह तृतीय पक्ष एप्लीकेशन प्रदाता है।

एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, 22 जुलाई गूगल इंडिया डिजिटल प्राइवेट लिमिटेड ने दिल्ली उच्च न्यायालय से कहा है कि गूगल-पे ऐप को भारतीय रिजर्व बैंक से अनुमति की आवश्यकता नहीं है क्योंकि यह भुगतान प्रणाली संचालक (पीएसओ) नहीं, बल्कि यह तृतीय पक्ष एप्लीकेशन प्रदाता है।

गूगल ने एक शपथ पत्र में कहा है कि भारतीय रिजर्व बैंक से प्राधिकृत पीएसओ भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) है, जो समूचे एकीकृत भुगतान इंटरफेस (यूपीआई) नेटवर्क का मालिक एवं संचालक है।

यह भी पढ़े | Rajasthan Political Crisis: CM अशोक गहलोत ने PM मोदी को लिखा पत्र, कहा- हमारी सरकार को गिराने की हो रही है कोशिश, मेरे दल के महत्वकांक्षी नेता भी शामिल.

शपथ पत्र में कहा गया कि एनपीसीआई भुगतान सेवा प्रदाता बैंकों और गूगल-पे जैसे तृतीय पक्ष एप्लीकेशन प्रदाताओं (टीपीए) को अपने नेटवर्क पर लेन-देन के लिए अधिकृत करती है।

हलफनामा उस जनहित याचिका के जवाब में दायर किया गया जिसमें आरोप लगाया गया था कि गूगल का मोबाइल भुगतान ऐप-गूगल-पे या जी-पे भारतीय रिजर्व बैंक से आवश्यक अनुमति के बिना वित्तीय लेन-देन उपलब्ध करा रहा है।

यह भी पढ़े | राजधानी दिल्ली में अपराधियों के हौंसले बुलंद, दिनदहाड़े 4 चार साल की बच्ची के अपहरण की कोशिश, मां ने ऐसे बचाई बेटी की जान: देखें VIDEO.

मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति डी एन पटेल और न्यायमूर्ति प्रतीक जालान की पीठ मामले पर अगली 31 अगस्त को सुनवाई करेगी क्योंकि याचिकाकर्ता ने गूगल के शपथ पत्र पर जवाब देने के लिए समय दिए जाने का आग्रह किया।

याचिकाकर्ता, वित्तीय अर्थशास्त्री अभिजीत मिश्रा ने दावा किया है कि जी-पे नियमों का उल्लंघन कर भुगतान प्रणाली प्रदाता के रूप में काम कर रहा है और इसके पास भारत के केंद्रीय बैंक से आवश्यक अनुमति नहीं है।

उन्होंने यह भी दलील दी कि जी-पे का नाम 20 मार्च 2019 को जारी भुगतान प्रणाली प्रदाताओं की एनपीसीआई की सूची में नहीं है।

गूगल ने अधिवक्ता हिमांशु विज के माध्यम से दलील दी कि वह एनपीसीआई के नियमों के तहत काम करता है और इसके दिशा-निर्देशों तथा संबंधित कानूनों का पालन करता है।

भारतीय रिजर्व बैंक ने पूर्व में कहा था कि गूगल-पे तृतीय पक्ष ऐप प्रदाता है और वह कोई भुगतान प्रणाली नहीं चलाता। इसलिए इसका परिचालन भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 का उल्लंघन नहीं है।

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)

Share Now

\