देश की खबरें | चक्रवात बिपारजॉय के दौरान केंद्र, गुजरात सरकार के बीच रहा अच्छा समन्वय: सूत्र

नयी दिल्ली, 17 जून केंद्र और गुजरात सरकारों, एनडीआरएफ और चक्रवात बिपारजॉय के दौरान संबंधित सभी एजेंसियों के बीच अच्छे समन्वय की वजह से कीमती जान बचीं। यह जानकारी सूत्रों ने शनिवार को दी।

भारत मौसम विज्ञान विभाग ने अद्यतन जानकारी में कहा कि बृहस्पतिवार शाम को जखौ बंदरगाह के पास भूभाग से टकराने वाला गंभीर चक्रवाती तूफान बिपारजॉय एक गहरे दबाव के क्षेत्र में तब्दील हो गया है और आगे यह एक दबाव में तब्दील हो जाएगा।

गृहमंत्री अमित शाह ने राहत कार्यों का जायजा लेने के लिए गुजरात के चक्रवात प्रभावित क्षेत्रों जखौ और मांडवी का दौरा किया।

घटनाक्रम से जुड़े सूत्रों ने कहा कि गुजरात में आए चक्रवाती तूफान के दौरान केंद्र और राज्य सरकारों, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) और संबंधित सभी एजेंसियों के बीच बहुत अच्छा समन्वय था।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व और गृहमंत्री शाह के सक्षम मार्गदर्शन में इतने बड़े तूफान से निपटने में मिली सफलता मजबूत और सफल आपदा प्रतिरोध और प्रबंधन की कहानी को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि जानमाल के नुकसान को कम करने के लिए भारत सरकार का संकल्प इन प्रयासों में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।

उन्होंने कहा कि आपदा प्रतिरोधी बुनियादी ढांचे के लिए अंतरराष्ट्रीय गठबंधन के गठन से लेकर एनडीआरएफ को मजबूत करने और विस्तार करने के लिए उठाए गए कदमों तक, प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में सरकार की प्रतिबद्धता, आपदा के दौरान कोई भी हताहत नहीं हो यह सुनिश्चित करने के लिए प्रत्यक्ष दृष्टिगोचर रही।

उन्होंने बताया कि केंद्रीय गृह मंत्रालय के निरंतर प्रयासों के कारण पिछले नौ वर्ष में चक्रवातों के कारण होने वाले जान-माल के नुकसान में लगभग 98 प्रतिशत की कमी आई है। उन्होंने कहा कि केंद्र ने प्रधानमंत्री के नेतृत्व में आपदा प्रबंधन के प्रति एक समग्र और एकीकृत दृष्टिकोण अपनाया।

उन्होंने कहा कि पहले, आपदाओं के प्रति सरकारों का दृष्टिकोण आपदा के बाद राहत के बारे में था जो अब, आपदा से पहले तैयारी के माध्यम से यह सुनिश्चित करने का दृष्टिकोण है कि इसमें कोई हताहत नहीं हो।

सूत्रों ने कहा कि यह इस बात का भी संकेत है कि आपदाओं के प्रति पारंपरिक निर्धारणात्मक दृष्टिकोण छोड़ दिया गया है और यह संकल्प लिया गया है कि हालांकि प्राकृतिक आपदाओं से बचना संभव नहीं है, दृढ़ संकल्प एवं प्रयास से कम से कम नुकसान सुनिश्चित किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि ‘नये भारतद्ध’ की झलक साफ दिखाई दे रही है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन योजना प्रधानमंत्री मोदी द्वारा शुरू की गई है।

सूत्रों ने बताया कि केंद्र ने आपदा प्रबंधन की दिशा में कई अहम नीतिगत फैसले लिए हैं। उन्होंने कहा कि 2014-15 से 2022-23 तक, इसने राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष के तहत 76,000 करोड़ रुपये और राज्य आपदा राहत कोष के लिए 1.07 लाख करोड़ रुपये जारी किए जो कि 2005-06 और 2013-14 के बीच जारी राशि की तुलना में तीन गुना अधिक है।

उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय आपदा शमन कोष की स्थापना फरवरी 2021 में गृहमंत्री शाह ने 13,693 करोड़ रुपये के आवंटन के साथ की थी। उन्होंने बताया कि इसके अतिरिक्त, राज्य आपदा शमन कोष के तहत 32,031 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।

उन्होंने कहा कि एनडीआरएफ को "सक्रिय उपलब्धता" के लिए "पूर्व-तैनाती" की नीति के तहत 26 राज्यों में तैनात किया गया है। उन्होंने बताया कि मोदी शासन के दौरान, एनडीआरएफ टीमों की उपस्थिति और उनकी परिवहन व्यवस्था को सुव्यवस्थित किया गया है और सभी राज्यों में एसडीआरएफ का गठन किया गया है।

सूत्रों ने कहा कि गृह मंत्रालय अब राज्य सरकारों से ज्ञापन की प्रतीक्षा किए बिना प्राकृतिक आपदाओं के तुरंत बाद अंतर-मंत्रालयी समिति टीमों को सक्रिय रूप से भेज रहा है। सूत्रों ने बताया कि पिछले चार वर्षों में आपदा के 10 दिनों के भीतर 73 अंतर-मंत्रालयी समिति की टीमों को विभिन्न राज्यों में भेजा गया है।

सूत्रों ने बताया कि आवश्यक सूची तैयार रखने और आपदा के बाद तत्काल राहत प्रदान करने के लिए 250 करोड़ रुपये की परिक्रामी निधि के साथ एक राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया रिजर्व बनाया गया है।

सूत्रों के अनुसार आपदा प्रबंधन में एक लाख से अधिक युवा स्वयंसेवकों को प्रशिक्षित करने के उद्देश्य से 350 बहु-खतरा आपदा-प्रवण जिलों में 'आपदा मित्र योजना' लागू की गई है। सूत्रों ने कहा कि केंद्र 'आपदा मित्र योजना' के सभी स्वयंसेवकों को जीवन बीमा प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि इस योजना को 369.41 करोड़ रुपये के कुल परिव्यय के साथ मंजूरी दी गई थी।

उन्होंने बताया कि मार्च 2021 में, गृहमंत्री शाह ने मोबाइल फोन के माध्यम से प्राकृतिक आपदाओं पर भू-स्थान-आधारित वास्तविक समय में अलर्ट प्रदान करने के लिए 354 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ साझा अलर्ट प्रोटोकॉल शुरू किया था।

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