नयी दिल्ली, 20 नवंबर सीबीआई ने गोमती रिवरफ्रंट विकास परियोजना घोटाले की जांच का जिम्मा संभालने के करीब तीन साल बाद मामले में पहली गिरफ्तारी करते हुए पूर्व कार्यकारी अभियंता और एक वरिष्ठ सहायक को हिरासत में ले लिया।
अधिकारियों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि तत्कालीन कार्यकारी अभियंता रूप सिंह यादव और सिंचाई विभाग के एक वरिष्ठ सहायक राज कुमार को गिरफ्तार किया गया है।
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उन्होंने बताया कि आरोपियों को शुक्रवार को एक विशेष अदालत में पेश किया गया और अदालत ने उन्हें चार दिन की सीबीआई हिरासत में भेज दिया।
सीबीआई ने उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार की सिफारिश के बाद 2017 में मामले की जांच का जिम्मा अपने हाथ में लिया था। भाजपा सरकार ने कथित अनियमितताओं पर गौर करने के लिए इलाहाबाद उच्च न्यायालय के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया था।
अधिकारियों ने कहा कि समिति ने प्रथम दृष्टया परियोजना में प्रशासनिक अनियमितता पाई और उसने कई अधिकारियों के खिलाफ गहन जांच की सिफारिश की थी।
सीबीआई प्रवक्ता आरके गौड़ ने कहा कि कथित अनियमितताओं में निविदा के लिए नोटिस ((एनआईटी)) का प्रकाशन नहीं करना, परियोजना के चार प्रमुख कामों में कोष की हेराफेरी आदि की जांच की जा रही है।
उन्होंने एक बयान में कहा कि यह भी आरोप है कि आरोपियों ने कुछ ठेकेदारों का पक्ष लिया और अखबारों में एनआईटी के प्रकाशन के बिना ही फर्जी दस्तावेजों के आधार पर उनके साथ समझौते किए।
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