देश की खबरें | गोवा: 1960 के दशक में डूबा जहाज पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बना
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. गोवा में 50 साल से अधिक समय पूर्व वास्को बंदरगाह शहर के पास डूबा एक जहाज गोताखोरी के शौकीन लोगों को आकर्षित कर रहा है।
पणजी, 17 जुलाई गोवा में 50 साल से अधिक समय पूर्व वास्को बंदरगाह शहर के पास डूबा एक जहाज गोताखोरी के शौकीन लोगों को आकर्षित कर रहा है।
गुजरात से गोवा तक रेल की पटरियों को ले जाने वाला एसएस रीटा जहाज 1960 के दशक में ‘ग्रैंड आइलैंड’ के पास डूब गया था।
माना जा रहा है कि चट्टानों से टकराने के बाद जहाज पलट गया, लेकिन घटना का कोई ब्योरा उपलब्ध नहीं है। यह मलबा दक्षिण गोवा जिले में जुआरी नदी की तलहटी पर स्थित है।
स्कूबा गोताखोरी प्रशिक्षण संस्थान चलाने वाले एक पूर्व नौसैनिक स्कंदन वारियर ने कहा, “जहाज का मलबा देखने के लिए पर्यटकों में बहुत रुचि है। यह द्वीप के पास के सात गोताखोरी स्थलों में से एक है।’’
उन्होंने कहा कि सात से 14 मीटर की गहराई पर पानी के भीतर पड़े जहाज के अवशेष कृत्रिम चट्टान में बदल गए हैं, जो अब अब मछलियों का भी आश्रय हैं।
उन्होंने कहा कि मलबा देख चुके गोताखोरों का दावा है कि यह एक अद्भुत स्थल है। इस जहाज की चरखी, धनुष, डेविट (नौकाओं को कम करने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली क्रेन) और एक सीढ़ी को कमोबेश मौलिक रूप में देख सकता है।
ग्रैंड आइलैंड के आसपास के क्षेत्र में सात गोताखोरी केंद्र हैं। स्थानीय मछुआरे एंथनी फर्नांडीज ने कहा कि भारतीय पर्यटकों में स्कूबा गोताखोरी में रुचि बढ़ रही है।
एंथनी ने कहा, ‘‘कोविड-19 महामारी के बाद हमने अधिक से अधिक घरेलू पर्यटकों को गोताखोरी करते हुए देखा है।’’
वारियार ने कहा कि इसी क्षेत्र में दो और जहाजों के भी डूबने की जानकारी है, लेकिन वे समुद्र तल के गहरे हिस्सों में स्थित हैं, जहां तक आसानी से नहीं पहुंचा जा सकता।
उन्होंने कहा कि इन दोनों जहाजों के मलबे पानी से 18 से 20 मीटर नीचे हैं, इसलिए नौसिखिए गोताखोरों के लिए वहां पहुंचना कठिन है।
संतोष देवेंद्र
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