वैश्विक उद्योग संगठनों की भारत से समानीकरण शुल्क नौ माह टालने की मांग
यूएस इंडिया बिजनेस काउंसिल, सूचना प्रौद्योगिकी उद्योग परिषद, जापान इलेक्ट्रानिक्स एण्ड इंफार्मेशन टैक्नालॉजी इंडस्ट्रीज एसोसिसन, एशिया प्रशांत एमएसएमई व्यापार गठबंधन और डिजिटल यूरोप सहित नौ व्यावसायिक संस्थाओं के समूह ने सरकार से समानीकरण शुल्क (दो प्रतिशत कर) पर विचार करने की मांग की है। यह शुल्क सरकार ने इसी वित्त वर्ष में लगाया है।
नयी दिल्ली, 29 अप्रैल विदेशी कंपनियों के संगठनों ने कोविड- 19 महामारी के प्रसार को देखते हुये वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से गैर- निवासी ई- वाणिज्य कंपनियों पर लगाये गये दो प्रतिशत इक्वलाइजेशन (समानीकरण) कर को नौ माह टालने की गुहार लगाई है। वॉलमार्ट, अमेजन, गूगल और नेटफ्लिक्स जैसी वैश्विक ई-वाणिज्य कंपनियां इन संस्थाओं की सदस्य हैं।
यूएस इंडिया बिजनेस काउंसिल, सूचना प्रौद्योगिकी उद्योग परिषद, जापान इलेक्ट्रानिक्स एण्ड इंफार्मेशन टैक्नालॉजी इंडस्ट्रीज एसोसिसन, एशिया प्रशांत एमएसएमई व्यापार गठबंधन और डिजिटल यूरोप सहित नौ व्यावसायिक संस्थाओं के समूह ने सरकार से समानीकरण शुल्क (दो प्रतिशत कर) पर विचार करने की मांग की है। यह शुल्क सरकार ने इसी वित्त वर्ष में लगाया है।
अमेरिका, यूरोपीय, आस्ट्रेलियाई और एशिया क्षेत्र की कंपनियों का प्रतिनिधित्व करने वाली इन व्यावसायिक संस्थाओं ने संयुक्त पत्र भेजकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सहित जी20 समूह के नेताओं द्वारा व्यक्त मुक्त, उचित, निष्पक्ष, पारदर्शी, विश्वसनीय और स्थिर व्यापार और निवेश परिवेश उपलब्ध कराये जाने की प्रतिबद्धता का जिक्र किया है। इन संस्थाओं का कहना है कि जी20 देशों के नेताओं ने वैश्विक बाजारों को खुला और भेदभाव रहित रखने की प्रतिबद्धता जताई है।
इस संयुक्त पत्र में इन संस्थाओं ने कहा है, ‘‘अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यक्ति की गई इस प्रतिबद्धता को संज्ञान में लेते हुये पूरे सम्मान के साथ हम समानीकरण शुल्क लगाये जाने के मामले में औपचारिक स्तर पर संबंधित पक्षकारों के साथ विचार विमर्श करने और केन्द्र सरकार के वित्त विधेयक 2020 की धारा 165ए में लगाये गये शुल्क के क्रियान्वयन को कम से नौ माह टालने का आग्रह करते हैं।’’
पत्र में कहा गया है कि धारा165ए के तहत भारत की मौजूदा समानीकरण शुल्क के तहत दो प्रतिशत का नया शुलक लगाकर इसे विस्तारित किया गया है। यह शुल्क भारत में गैर- निवासी ई-वाणिज्य परिचालन करने वाली कंपनियों द्वारा माल एवं सेवाओं की आनलाइन बिक्री पर लगाया गया है। गैर- प्रवासी ई-वाणिज्य परिचालक ऐसी कंपनियां हैं जो कि भारत में रह रहे नागरिकों को आनलाइन माल एवं सेवाओं की आपूर्ति करतीं हैं। कारोबारी उद्देश्य से उनकी जानकारी जुटातीं हैं लेकिन कर के दायरे में आने के लिहाज से उनकी यहां उपस्थिति नहीं होती है।
कई इंटरनेट कंपनियां ऐसी हैं जो कि भारत में विज्ञापन और उत्पादों की बिक्री एक अलग कंपनी के जरिये करती हैं। आमतौर पर ये कंपनियों ऐसी विदेशी भूमि पर पंजीकृत होती हैं जो कि कर के लिहाज से उनके लिये स्वर्ग के समान हैं।
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(The above story first appeared on LatestLY on Apr 29, 2020 06:52 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

