मंदी की चपेट में जर्मनी, मार्च तिमाही में 2.2 प्रतिशत गिरी जीडीपी
संघीय सांख्यिकी कार्यालय के आंकड़ों में कोरोना वायरस महामारी से हुई आर्थिक तबाही की शुरुआती झलकियां दिख रही हैं।
इससे पहले दिसंबर तिमाही में भी जर्मनी की जीडीपी आंशिक तौर पर कम हुई थी। इस तरह जर्मनी अब पूरी तरह से मंदी की चपेट में आ गया है। जर्मनी से पहले फ्रांस और इटली जैसी बड़ी यूरोपीय अर्थव्यवस्थाएं मंदी की चपेट में आ चुकी हैं।
संघीय सांख्यिकी कार्यालय के आंकड़ों में कोरोना वायरस महामारी से हुई आर्थिक तबाही की शुरुआती झलकियां दिख रही हैं।
संघीय सांख्यिकी कार्यालय के वरिष्ठ अधिकारी अलबर्ट ब्राकमैन ने कहा कि 1990 में जर्मनी के एकीकरण के बाद यह किसी तिमाही में जीडीपी में आयी दूसरी सबसे बड़ी गिरावट है। वैश्विक वित्तीय संकट के समय 2009 की पहली तिमाही में जर्मनी की जीडीपी 4.7 प्रतिशत कम हुई थी।
पिछले साल की सितंबर तिमाही में जर्मनी की जीडीपी में मामूली 0.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी, जबकि दिसंबर तिमाही में जीडीपी में 0.1 प्रतिशत की गिरावट आयी थी।
यदि कोई अर्थव्यवस्था लगातार दो तिमाही में गिरावट में रहती है तो तकनीकी तौर पर इसे आर्थिक मंदी कहा जाता है।
कोरोना वायरस का कहर यूरोप में मार्च में शुरू हुआ। इसके कारण सबसे पहले इटली ने और बाद में अधिकतर यूरोपीय देशों ने लॉकडाउन लगाया। जर्मनी ने मार्च के मध्य से लॉकडाउन लगाना शुरू किया। हालांकि जर्मनी में पाबंदियां अन्य देशों की तुलना में आसान थीं। जर्मनी में कारखानों को बंद करने का आदेश कभी नहीं दिया गया, लेकिन इसके बाद भी वाहन क्षेत्र जैसे कई क्षेत्रों में काम-काज पूरी तरह से बंद हो गया।
आंकड़ों के अनुसार, मार्च में कारखानों के ऑर्डर में मासिक आधार पर 15.6 प्रतिशत की गिरावट आयी। इसके अलावा मार्च में औद्योगिक उत्पादन 9.2 प्रतिशत और निर्यात 11.8 प्रतिशत गिर गया। यह जर्मनी के निर्यात में 1990 में हुए एकीकरण के बाद की सबसे बड़ी गिरावट है।
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(The above story first appeared on LatestLY on May 15, 2020 08:53 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

