जरुरी जानकारी | जीईईसीएल शैल गैस की खोज में दो अरब डॉलर का निवेश करेगी

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. भारत में कोल बेड मीथेन के क्षेत्र में अग्रणी कंपनी ग्रेट ईस्टर्न एनर्जी कॉरपोरेशन लिमिटेड (जीईईसीएल) खोज कार्यों के लिए लगभग दो अरब अमेरिकी डॉलर (15,000 करोड़ रुपये) का निवेश करने की योजना बना रहा है।

नयी दिल्ली, पांच जून भारत में कोल बेड मीथेन के क्षेत्र में अग्रणी कंपनी ग्रेट ईस्टर्न एनर्जी कॉरपोरेशन लिमिटेड (जीईईसीएल) खोज कार्यों के लिए लगभग दो अरब अमेरिकी डॉलर (15,000 करोड़ रुपये) का निवेश करने की योजना बना रहा है।

जीईईसीएल के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) प्रशांत मोदी ने यह जानकारी देते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल के रानीगंज साउथ ब्लॉक में शैल गैस की खोज के लिए यह निवेश किया जाएगा।

उन्होंने कहा, ‘‘हमने सीबीएम (कोल बेड मीथेन) के लिए जो किया, उसे हम शैल में फिर से दोहराना चाहते हैं... हम भारत में सीबीएम की खोज, उत्पादन और विकास में अग्रणी हैं।’’

सीबीएम कोयले की परतों के नीचे जमा गैस है। जीईईसीएल ने 31 मई, 2001 को रानीगंज साउथ ब्लॉक के लिए भारत के पहले सीबीएम अनुबंध पर हस्ताक्षर किए थे।

उन्होंने कहा, ‘‘हमने सबसे पहले जुलाई, 2007 में सीबीएम का व्यावसायीकरण किया।’’

उन्होंने कहा, ‘‘हमारे पास अपने ब्लॉक में 6,630 अरब घन फुट (टीसीएफ) तक के शैल संसाधन की बड़ी संभावना है।’’

मोदी ने आगे कहा, ‘‘हम पश्चिम बंगाल सरकार से शैल खोज के लिए हमारे पेट्रोलियम खनन पट्टे में संशोधन की प्रतीक्षा कर रहे हैं। इसके बाद, हम भूवैज्ञानिक और अन्य तकनीकी कारकों का आकलन करने के लिए कुछ शैल मुख्य कुओं की खुदाई की योजना बना रहे हैं।’’

इन कुओं के विश्लेषण से मिले नतीजों के अनुसार जीईईसीएल कुछ प्रायोगिक उत्पादन कुओं की खुदाई करेगा।

मोदी ने कहा, ‘‘यदि प्रमुख (कोर) कुओं से मिले नतीजे हमारी उम्मीदों के अनुसार रहे तो हमारे शैल कार्यक्रम में कुल निवेश लगभग दो अरब डॉलर यानी 15,000 करोड़ रुपये हो सकता है।’’

वैश्विक स्तर पर ऊर्जा की कीमतों में वृद्धि के कारण तेल और गैस कंपनियों की आय बढ़ने के चलते सरकार इन पर अतिरिक्त कर लगाने के बारे में विचार कर रही है। इस बारे में पूछने पर उन्होंने कहा, ‘‘यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण होगा। अगर सरकार ऐसा फैसला करती है तो यह तेल तथा गैस क्षेत्र के लिए एक आपदा होगी।’’

उन्होंने कहा, ‘‘नीति निर्माता उस समय कहां थे, जब तेल की कीमत नकारात्मक हो गई थी और लंबे समय तक 20-30 डॉलर प्रति बैरल की सीमा में रही। कंपनियों को घाटा हुआ और उनमें से कई दिवालिया भी हो गईं। ’’

कच्चे तेल की कीमतें इस समय 110 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चल रही हैं।

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