सकल घरेलू उत्पाद में इस साल आ सकती है गिरावट: रिजर्व बैंक गवर्नर

आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि मुद्रास्फीति परिदृश्य भी ‘काफी अनिश्चित’ बना रहेगा। मौजूदा संकट से निपटने के लिए रिजर्व बैंक ने मौद्रिक उपाय के तौर पर शुक्रवार को रेपो दर में 0.40 प्रतिशत की कटौती की घोषणा की।

मुंबई, 22 मई रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने शुक्रवार को कहा कि कोरोना वायरस संकट का असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पहले के अनुमान के मुकाबले ज्यादा रह सकता है। लॉकडाउन के चलते आर्थिक गतिविधियां बाधित होने से चालू वित्त वर्ष के दौरान देश की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में गिरावट आ सकती है।

आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि मुद्रास्फीति परिदृश्य भी ‘काफी अनिश्चित’ बना रहेगा। मौजूदा संकट से निपटने के लिए रिजर्व बैंक ने मौद्रिक उपाय के तौर पर शुक्रवार को रेपो दर में 0.40 प्रतिशत की कटौती की घोषणा की।

पिछले दो महीने में रेपो दर में यह लगातार दूसरी बड़ी कटौती है। इससे पहले 27 मार्च को मौद्रिक नीति समिति की बैठक में रिजर्व बैंक ने नीतिगत दर में 0.75 प्रतिशत की कटौती की थी।

लॉकडाउन और शारीरिक दूरी से जुड़ी सभी अनिश्चिताओं को ध्यान में रखते हुए दास ने कहा, ‘‘ 2020-21 में जीडीपी वृद्धि दर नकारात्मक रहने का अनुमान है। दूसरी छमाही से ही थोड़ी बहुत वृद्धि की उम्मीद की जा सकती है।’’

आरबीआई गवर्नर ने टेलीविजन के माध्यम से अपने संबोधन में कहा कि वृद्धि से जुड़ा यह जोखिम सबसे अधिक ‘गहरा’ है। ‘मांग में कमी और आपूर्ति में बाधा के चलते वित्त वर्ष की पहली छमाही में आर्थिक गतिविधियों पर दबाव रहेगा।’’

उन्होंने कहा कि चरणबद्ध तरीके से आर्थिक गतिविधियां शुरू किए जाने के बावजूद मौजूदा समय में उठाए जा रहे राजकोषीय, मौद्रिक और प्रशासनिक कदमों का अर्थव्यवस्था पर असर 2020-21 की दूसरी छमाही में ही दिखना शुरू होगा।

दास ने कहा कि यह बहुत हद तक इस बात पर निर्भर करेगा कि कोविड-19 का संक्रमण कितनी तेजी से सीमित होता है।

मई 2020 के अंत में जारी होने वाले राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के आंकड़े राष्ट्रीय आय के बारे में अधिक स्पष्ट तस्वीर सामने रखेंगे। इससे जीडीपी वृद्धि दर को लेकर अधिक सटीक अनुमान लगाने और उसकी दिशा के बारे में जानकारी प्राप्त करने में मदद मिलेगी।

दास की अध्यक्षता वाली मौद्रिक नीति समिति का मानना है कि कोविड-19 महामारी का वृहद आर्थिक प्रभाव उम्मीद से ज्यादा गंभीर रहने का अनुमान है। अर्थव्यवस्था के कुछ क्षेत्रों पर भारी दबाव रहेगा।

मौद्रिक नीति समिति की बैठक 20 से 22 मई को हुई जो पहले तीन से पांच जून के बीच होनी थी।

उन्होंने कहा, ‘‘दो महीनों के लॉकडाउन से घरेलू आर्थिक गतिविधियां बुरी तरह प्रभावित हुई है।’’ साथ ही उन्होंने जोड़ा कि शीर्ष छह औद्योगिक राज्य, जिनका भारत के औद्योगिक उत्पादन में 60 प्रतिशत योगदान है, वे मोटे तौर पर कोरोना वायरस प्रभाव वाले ‘रेड’ या ‘ऑरेन्ज’ क्षेत्र में हैं।

उन्होंने कहा कि मांग में गिरावट के संकेत मिल रहे हैं और बिजली तथा पेट्रोलियम उत्पादों की मांग घटी है।

गवर्नर ने कहा कि सबसे अधिक झटका निजी खपत में लगा है, जिसकी घरेलू मांग में 60 फीसदी हिस्सेदारी है।

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