परियोजनाओं को हरित मंजूरी मिलने में देरी को लेकर गडकरी ने जतायी अप्रसन्नता
उन्होंने पाया कि पर्यावरण और वन मंजूरी से जुड़ी फाइलें कई बार दो साल तक अटकी रह जाती हैं। इससे बैंक कर्ज देने से पीछे हट जाते हैं और खाता एनपीए (गैर-निष्पादित परिसंपत्ति) में तब्दील हो जाता है।
नयी दिल्ली, 15 मई केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने परियोजनाओं को पर्यावरण मंजूरी मिलने में देरी को लेकर शुक्रवार को अप्रसन्नता जतायी। उन्होंने कहा कि इससे कार्यों के क्रियान्वयन में बाधा उत्पन्न हो रही है।
उन्होंने पाया कि पर्यावरण और वन मंजूरी से जुड़ी फाइलें कई बार दो साल तक अटकी रह जाती हैं। इससे बैंक कर्ज देने से पीछे हट जाते हैं और खाता एनपीए (गैर-निष्पादित परिसंपत्ति) में तब्दील हो जाता है।
एमएसएएमई (सूक्ष्म, लघु एवं मंझोले उद्यम), सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री ने कहा कि समयबद्ध मंजूरी के लिये कोई प्रावधान नहीं है, इससे परियोजनाओं को अनापत्ति प्रमाणपत्र देने में विलम्ब होता है।
उद्योग मंडल फिक्की द्वारा उच्च शिक्षा पर आयोजित वेबिनार (इंटरनेट के माध्यम से होने वाला सेमिनार) को संबोधित करते हुए गडकरी ने कहा कि भारतीय शैक्षणिक संस्थानों को विदेशी छात्रों को आकर्षित करने और आर्थिक रूप से खुद को व्यावहारिक बनाने के लिये औद्योगिक गठजोड़ करना चाहिए और विदेशी विश्वविद्यालय के साथ हाथ मिलाना चाहिए।
उन्होंने सरकार की सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यम क्षेत्र में संयुक्त उद्यम बनाने, प्रौद्योगिकी को उन्नत बनाने तथा विदेशी निवेश आकर्षित करने की योजनाओं के बारे में भी जानकारी दी।
देश में हर साल 5 लाख सड़क हादसों में 1.5 लाख लोगों की मौत होने का जिक्र करते हुए मंत्री ने यह भी कहा कि आईआईटी और अन्य इंजीनियरिंग संस्थानों के छात्रों को सड़कों के ‘आडिट’ करने और गड़बड़ियों का पता लगाने के काम से जोड़ा जा सकता है।
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(The above story first appeared on LatestLY on May 15, 2020 09:12 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

