जयपुर, 23 अगस्त वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने बुधवार को कहा कि जी-20 के सदस्यों को उद्योगों, एमएसएमई एवं वैश्विक व्यापार के प्रोत्साहन के लिए 'जयपुर कार्य योजना' पर सहमति बनने का इंतजार है।
जी-20 समूह के सदस्य देशों के व्यापार एवं निवेश मंत्रियों की 24-25 अगस्त को जयपुर में बैठक होने वाली है। इसमें शामिल होने के लिए प्रतिनिधि यहां इकट्ठा होना शुरू हो चुके हैं।
गोयल ने इस बैठक के बारे में संवाददाताओं को जानकारी देते हुए कहा कि संबंधित देशों के अधिकारी प्राथमिकता वाले बिंदुओं पर आम सहमति बनाने और एक दस्तावेज तैयार करने की कोशिश में लगे रहे हैं।
उन्होंने रूस-यूक्रेन संघर्ष की वजह से सदस्य देशों के बीच असहमति होने की आशंकाओं के बारे में पूछे जाने पर कहा कि जी20 के सदस्य इस वास्तविकता को ध्यान में रखते हुए अधिकतम मुद्दों पर सहमति बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
गोयल ने कहा, "कुछ ऐसी वास्तविकताएं हैं जिन पर सहमति बनने की कोई संभावना नहीं है। इन्हें छोड़कर हम प्राथमिकता वाले बाकी सभी बिंदुओं पर सहमति बनाने की कोशिश में लगे हुए हैं।"
जी-20 के वित्त मंत्रियों की फरवरी में बेंगलुरु में हुई बैठक किसी संयुक्त वक्तव्य के बगैर ही खत्म हो गई थी। यूक्रेन पर रूस की सैन्य कार्रवाई का उल्लेख किए जाने के सवाल पर मतभेद पैदा होने से ऐसा हुआ था।
इसी तरह जुलाई में गांधीनगर में हुई वित्त मंत्रियों एवं केंद्रीय बैंकों के गवर्नरों की बैठक भी किसी वक्तव्य के बगैर खत्म हो गई थी।
गोयल ने जयपुर बैठक में एक कार्य योजना पर सहमति बनने की उम्मीद जताते हुए कहा, "हम सदस्य देशों के बीच महत्वपूर्ण बिंदुओं पर सहमति बनाने में सफल रहे हैं। जयपुर कार्य योजना से उद्योग और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र को प्रोत्साहन मिलेगा और वैश्विक व्यापार में सुधार होगा। इससे एमएसएमई को अपने कारोबार एवं व्यापार का विस्तार करने में भी मदद मिलेगी।"
उन्होंने कहा, "हमें भरोसा है कि अगले दो दिनों में हम एक ऐसे एजेंडा के साथ सामने आ पाएंगे जिसे अमल में लाया जा सके। इससे दुनिया को किसी भी भावी झटकों का सामना करने में मदद मिलेगी।"
गोयल ने इस बैठक में शिरकत करने के लिए पहुंचे विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) की महानिदेशक नगोजी ओकोंजो आइवेला के साथ एक द्विपक्षीय बैठक भी की। इस दौरान उन्होंने डब्ल्यूटीओ में सुधार की जरूरत पर बल देते हुए कहा कि विकसित एवं अल्प-विकसित देशों के लिए विकास के पैमानों पर ध्यान देना चाहिए।
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