देश की खबरें | फॉर्मूला-4 रेस: निजी कंपनी को तमिलनाडु सरकार को पैसे लौटाने का निर्देश देने वाला आदेश रद्द

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उच्चतम न्यायालय ने 2023 में चेन्नई में आयोजित फॉर्मूला-4 रेस के सिलसिले में मद्रास उच्च न्यायालय के कई निर्देशों को बृहस्पतिवार को रद्द कर दिया, जिनमें एक निजी कंपनी को तमिलनाडु सरकार को 42 करोड़ रुपये का भुगतान करने का आदेश भी शामिल है।

नयी दिल्ली, 20 फरवरी उच्चतम न्यायालय ने 2023 में चेन्नई में आयोजित फॉर्मूला-4 रेस के सिलसिले में मद्रास उच्च न्यायालय के कई निर्देशों को बृहस्पतिवार को रद्द कर दिया, जिनमें एक निजी कंपनी को तमिलनाडु सरकार को 42 करोड़ रुपये का भुगतान करने का आदेश भी शामिल है।

न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने कहा कि मद्रास उच्च न्यायालय ने तमिलनाडु सरकार के खेल निकाय और प्रतियोगिता आयोजक रेसिंग प्रमोशन प्राइवेट लिमिटेड (आरपीपीएल) के बीच हुए अनुबंध की शर्तों में हस्तक्षेप करके अपने अधिकार क्षेत्र को “लांघा” है।

न्यायमूर्ति नरसिम्हा ने फैसला सुनाते हुए कहा, “एक बार जब उच्च न्यायालय इस बात से संतुष्ट हो गया कि रेस के आयोजन का फैसला नीतिगत मामला है, तो वह प्राधिकरण और आरपीपीएल के बीच हुए समझौता ज्ञापन (एमओयू) की विशिष्ट शर्तों में हस्तक्षेप नहीं कर सकता। जनहित याचिका में उठाए गए परस्पर दायित्व से जुड़े मुद्दे, जिनमें अनुबंध करने वाले पक्षों द्वारा वहन किए जाने वाले व्यय का बंटवारा भी शामिल है, उच्च न्यायालय के अधिकार क्षेत्र से परे हैं।”

उच्च न्यायालय ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कई निर्देश पारित किए थे, जिनमें आरपीपीएल को तमिलनाडु सरकार को 42 करोड़ रुपये वापस करने का निर्देश भी शामिल था। राज्य सरकार ने कार्यक्रम के आयोजन से पहले ही सरकारी खजाने से यह राशि खर्च कर दी थी।

उच्च न्यायालय ने कहा था, “भविष्य में राज्य से उम्मीद की जाती है कि वह रेस को प्रोत्साहित करने की अपनी नीति के तहत इस तरह के आयोजन की जिम्मेदारी खुद उठाए और इस क्षेत्र में अनुभव एवं विशेषज्ञता रखने वाले निजी निकायों का सहयोग ले। इससे निष्पक्षता सुनिश्चित होगी और राज्य सरकार द्वारा दी जाने वाली सहायता राशि के वितरण में दुर्भावना के संबंध में किसी भी तरह का संदेह भी दूर हो जाएगा।”

आरपीपीएल ने फॉर्मूला-4 रेस के आयोजन के लिए 16 अगस्त 2023 को तमिलनाडु खेल विकास प्राधिकरण (एसडीएटी) के साथ तीन साल के समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए थे।

एमओयू के तहत आरपीपीएल ने इस आयोजन पर 202 करोड़ रुपये खर्च करने की प्रतिबद्धता जताई थी, जबकि एसडीएटी पर लाइसेंस शुल्क, सड़क सुधार और अन्य लागत सहित 42 करोड़ रुपये खर्च करने की जिम्मेदारी थी।

राज्य सरकार ने आठ से दस दिसंबर के बीच रेस आयोजित करने के लिए दो नवंबर 2023 को एक बयान जारी किया।

उच्च न्यायालय में जनहित याचिकाएं दायर कर कई आपत्तियां जताई गईं, जिनमें सार्वजनिक असुविधा, सुरक्षा उपायों का अभाव, ध्वनि प्रदूषण, पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी को नुकसान और कार्यक्रम के लिए गैर-पारदर्शी तरीके से सार्वजनिक धन का इस्तेमाल किए जाने से निजी पक्ष को लाभ पहुंचना शामिल है।

हालांकि, उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया था कि वह मोटर रेस को खेल के रूप में बढ़ावा देने के सरकार के नीतिगत निर्णय में दखल नहीं देगा, लेकिन उसने कहा था कि एक निजी कंपनी इस रेस का आयोजन कर रही है और राज्य सरकार की भूमिका केवल आयोजन को सुविधाजनक बनाने तक सीमित है, इसलिए राजस्व लाभ केवल कंपनी को ही मिलेगा।

निजी कंपनी ने सार्वजनिक सुरक्षा और स्वास्थ्य को लेकर उच्च न्यायालय द्वारा जताई गई आपत्तियों पर कुछ नहीं कहा था, लेकिन वह राज्य द्वारा खर्च किए गए 42 करोड़ रुपये की प्रतिपूर्ति करने का निर्देश दिए जाने से नाखुश थी।

उच्चतम न्यायालय ने कहा कि खेल विकास प्राधिकरण खेलों को बढ़ावा देने और खिलाड़ियों के कल्याण के लिए एक नोडल सरकारी प्राधिकरण के रूप में काम करता है और इससे किसी और का कोई लेना-देना नहीं है कि उसने उदारतापूर्वक धन वितरित किया या सार्वजनिक धन का ‘असंगत इस्तेमाल’ किया।

पीठ ने कहा, “राज्य और उसके निजी साझेदार के बीच अनुबंधात्मक संबंधों से जुड़े मामलों में न्यायिक समीक्षा का दायरा, खास तौर पर कामकाज और वित्त के दायरे के संबंध में, सीमित है।”

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)

Share Now

\