देश की खबरें | पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का निधन, ‘सहमति बनाने वाले’ को याद कर रहा है राजनीतिक हलका

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. भारत के सर्वाधिक सम्मानित राजनेताओं में एक पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का सोमवार की शाम निधन हो गया। वह 84 वर्ष के थे।

एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, 31 अगस्त भारत के सर्वाधिक सम्मानित राजनेताओं में एक पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का सोमवार की शाम निधन हो गया। वह 84 वर्ष के थे।

मुखर्जी को गत 10 अगस्त को सेना के ‘रिसर्च एंड रेफ्रल हास्पिटल’ में भर्ती कराया गया था। उसी दिन उनके मस्तिष्क की सर्जरी की गई थी। उनके परिवार में दो पुत्र और एक पुत्री हैं।

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लंबे समय तक कांग्रेस के नेता रहे मुखर्जी सात बार सांसद रहे। अस्पताल में भर्ती कराये जाने के समय वह कोविड-19 से संक्रमित पाये गए थे। साथ ही उनके फेफड़ों के संक्रमण का भी इलाज किया जा रहा था। उन्हें इसके चलते रविवार को ‘सेप्टिक शॉक’ आया था। चिकित्सकों ने कहा कि शाम साढ़े चार बजे दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया।

आज सुबह जारी स्वास्थ्य बुलेटिन में उनके बारे में कहा गया था कि वह गहरे कोमा में वेंटिलेटर पर हैं।

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मुखर्जी के पुत्र अभिजीत मुखर्जी ने उनके निधन की सबसे पहले जानकारी दी। उन्होंने ट्वीट किया, ‘‘भारी मन से आपको सूचित करना है कि मेरे पिता श्री प्रणब मुखर्जी का अभी कुछ समय पहले निधन हो गया। आरआर अस्पताल के डॉक्टरों के सर्वोत्तम प्रयासों और पूरे भारत के लोगों की प्रार्थनाओं और दुआओं के लिए मैं आप सभी को हाथ जोड़कर धन्यवाद देता हूं।’’

परिवार ने बताया कि उनका अंतिम संस्कार मंगलवार दोपहर दो बजे लोधी रोड श्मशान घाट में होगा।

सरकार ने पूर्व राष्ट्रपति के निधन पर सात दिन के राजकीय शोक की घोषणा की है।

गृह मंत्रालय ने कहा कि दिवंगत सम्मानीय नेता के सम्मान में भारत में 31 अगस्त से लेकर छह सितंबर तक राजकीय शोक रहेगा। इस दौरान देश भर में उन सभी भवनों पर राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका रहेगा जहां ध्वज लगा रहता है।

मुखर्जी 2012 से 2017 तक देश के 13वें राष्ट्रपति थे। उनके निधन पर तमाम खास-ओ-आम ने शोक जताया।

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने मुखर्जी के निधन को एक युग का अंत बताया।

कोविंद ने ट्विटर पर कहा, ‘‘उन्होंने सार्वजनिक जीवन में एक विराट कद हासिल किया, उन्होंने भारत माता की सेवा एक संत की तरह की। एक विलक्षण सपूत के चले जाने से समूचा राष्ट्र शोकाकुल है। उनके परिजनों, मित्रों और सभी नागरिकों के प्रति संवेदनाएं।’’

कोविंद ने कहा, ‘‘असाधारण विवेक के धनी, भारत रत्न मुखर्जी के व्यक्तित्व में परंपरा और आधुनिकता का अनूठा संगम था।’’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के निधन पर गहरा शोक प्रकट करते हुए उन्हें सर्वोत्कृष्ट विद्वान और उच्च कोटि का राजनीतिज्ञ बताया जिनकी सभी राजनीतिक दलों और समाज के सभी वर्गों द्वारा प्रशंसा की जाती थी।’’

मोदी ने ट्वीट किया, ‘‘भारत रत्न प्रणब मुखर्जी के निधन पर भारत आज दुखी है। देश के विकास में वह अमिट छाप छोड़ गए हैं। वह एक सर्वोत्कृष्ट विद्वान और उच्च कोटि के राजनीतिज्ञ थे जिनकी सभी राजनीतिक दलों और समाज के सभी वर्गों द्वारा प्रशंसा की जाती थी।’’

प्रसिद्ध पश्चिम बंगाल में जन्मे मुखर्जी ने कांग्रेस नेता के तौर पांच दशक सक्रिय राजनीति में गुजारा और वह राजनीतिक दलों के बीच सहमति बनाने के लिए जाने जाते थे । इसका उदाहरण यह है कि प्रधानमंत्री मोदी और प्रणब मुखर्जी दोनों बिल्कुल अलग-अलग पृष्ठभूमि से आए, उसके बावजूद दोनों ने साथ मिलकर काम किया।

मोदी ने सिलसिलेवार ट्वीट कर कहा, ‘‘उनके परिवार, मित्रों और देश भर में उनके प्रशंसकों व समर्थकों के प्रति मेरी संवेदनाएं है। ओम शांति।’’

मोदी ने कहा कि साल 2014 में जब वह प्रधानमंत्री बने तो वह दिल्ली के लिए बिल्कुल नए थे। उन्होंने कहा, ‘‘पहले दिन से मुझे मुखर्जी का मार्गदर्शन, समर्थन और आशीर्वाद मिलने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। उनके साथ अपनी यादों को मैं हमेशा संजो कर रखूंगा।’’

उन्होंने कहा, ‘‘प्रमुख नीतिगत मुद्दों पर उनका ज्ञानपूर्ण परामर्श मैं कभी भी नहीं भूल पाऊंगा।’’ प्रधानमंत्री ने मुखर्जी के साथ अपनी कुछ तस्वीरें भी साझा कीं। इनमें से एक तस्वीर में वह मुखर्जी के पैर छूकर प्रणाम करते दिख रहे हैं।

उन्होंने कहा कि भारत के राष्ट्रपति के रूप में उन्होंने राष्ट्रपति भवन तक आम आदमी की पहुंच सरल बना दी। उन्होंने कहा, ‘‘राष्ट्रपति भवन को उन्होंने ज्ञान, नवाचार, संस्कृति, विज्ञान और साहित्य का केंद्र बनाया।’’

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने मुखर्जी की पुत्री शर्मिष्ठा को भेजे शोक संदेश में सोनिया ने परिवार के प्रति गहरी संवेदना भी प्रकट की।

उन्होंने कहा, ‘‘ प्रणब दा पांच दशकों से अधिक समय तक सार्वजनिक जीवन, कांग्रेस पार्टी और केंद्र सरकार का अभिन्न हिस्सा रहे। उन्होंने हर पद पर आसीन होने के साथ उसे सुशोभित करने का काम किया और अपने साथियों के साथ उनकी वास्तव में घनिष्ठता थी। उनका पिछले 50 वर्षों से अधिक का जीवन भारत के 50 वर्षों के इतिहास को प्रतिबिंबित करता है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘उनके साथ काम करने को लेकर मेरी निजी तौर पर बहुत सारी सुखद यादें हैं। कांग्रेस पार्टी उनके निधन पर गहरा शोक प्रकट करती है और उनकी स्मृति का सदैव सम्मान करेगी।’’

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने मुखर्जी के निधन पर दुख प्रकट करते हुए कहा कि देश ने स्वतंत्र भारत के एक महान नेता को खो दिया है।

सिंह ने एक बयान में कहा, ‘‘ पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के निधन के बारे में सुनकर गहरा दुख हुआ। हमारे देश ने स्वतंत्र भारत के एक महान नेता को खो दिया है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘हम दोनों ने भारत सरकार में बहुत नजदीकी से काम किया। मैं उनके विवेक, व्यापक ज्ञान और सार्वजनिक जीवन के उनके अनुभव पर निर्भर करता था।’’

वामपंथी दलों ने पूर्व राष्ट्रपति के निधन पर दुख प्रकट किया और राजनीतिक पार्टियों से इतर उनके सौहार्दपूर्ण संबंधों तथा विभिन्न सरकारों की तरफ से निभाई गई उनकी वार्ताकार की भूमिका को याद किया।

माकपा ने एक बयान में कहा कि मुखर्जी देश के एक ऐसे अग्रणी राजनीतिक व्यक्तित्व थे जिन्होंने अलग-अलग भूमिकाओं में भारत के लिए योगदान दिया।

भाकपा महासचिव डी राजा ने कहा कि मुखर्जी को विभिन्न पदों पर रहते हुए लोगों की सेवा करने के लिए हमेशा याद किया जाएगा।

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा, ‘‘हमारे पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी जी के दुखद निधन की खबर मिली। देश बहुत दुखी है। मैं उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करने में खुद को देश के साथ जोड़ता हूं। उनके परिवार और मित्रों के प्रति मेरी गहरी संवेदना है।’’

पश्चिम बंगाल में जन्मे इन राजनीतिज्ञ के नाम कई ऐसी महत्वपूर्ण उपलब्धियां हैं जो उन्हें दूसरों से अलग बनाती हैं। वह चलते फिरते ‘इनसाइक्लोपीडिया’ थे और हर कोई उनकी याददाश्त क्षमता, तीक्ष्ण बुद्धि और मुद्दों की गहरी समझ का मुरीद था।

साल 1982 में वे भारत के सबसे युवा वित्त मंत्री बने। तब वह 47 साल के थे। आगे चलकर उन्होंने विदेश मंत्री, रक्षा मंत्री और वित्त व वाणिज्य मंत्री के रूप में भी अपनी सेवाएं दीं। वे भारत के पहले ऐसे राष्ट्रपति थे जो इतने पदों को सुशोभित करते हुए इस शीर्ष संवैधानिक पद पर पहुंचे।

मुखर्जी भारत के एकमात्र ऐसे नेता थे जो देश के प्रधानमंत्री पद पर न रहते हुए भी आठ वर्षों तक लोकसभा के नेता रहे। वे 1980 से 1985 के बीच राज्यसभा में भी कांग्रेस पार्टी के नेता रहे।

मुखर्जी जब 2012 में देश के राष्ट्रपति बने तो उस समय वे केंद्र सरकार के मंत्री के तौर पर कुल 39 मंत्री समूहों में से 24 का प्रतिनिधित्व कर रहे थे। साल 2004 से 2012 के दौरान उन्होंने 95 मंत्री समूहों की अध्यक्षता की।

सत्ता के गलियारों में रहने के बावजूद मुखर्जी कभी अपनी जड़ों को नहीं भूले। यही वजह थी कि राष्ट्रपति बनने के बाद भी दुर्गा पूजा के समय वह अपने गांव जरूर जाया करते थे। मंत्री और राष्ट्रपति रहते पारंपरिक धोती पहने पूजा करते उनकी तस्वीरें अक्सर लोगों का ध्यान आकर्षित करती थीं।

राष्ट्रपति के रूप में भी उन्होंने एक अमिट छाप छोड़ी। इस दौरान उन्होंने दया याचिकाओं पर सख्त रुख अपनाया। उनके सम्मुख 34 दया याचिकाएं आईं और इनमें से 30 को उन्होंने खारिज कर दिया।

अर्पणा राजकुमार

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