देश की खबरें | उप्र में बुलडोजर चलाये जाने के मामले में पूर्व नौकरशाहों ने शीर्ष अदालत से हस्तक्षेप का आग्रह किया

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नयी दिल्ली, 21 जून भारतीय जनता पार्टी से अब निकाले जा चुके दो नेताओं द्वारा पैगम्बर मोहम्मद के खिलाफ की गयी कथित विवादास्पद टिप्पणी के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद उत्तर प्रदेश में कथित अवैध हिरासत, आवासों पर बुलडोजर चलाने और पुलिस की हिंसा को लेकर हस्तक्षेप का आग्रह करते हुए पूर्व नौकरशाहों के एक समूह ने प्रधान न्यायाधीश एन वी रमणा को पत्र लिखा है।

पूर्व नौकरशाहों ने पत्र में कहा है कि सबसे अधिक चिंताजनक बात यह है कि कानूनी रूप से विरोध करने या सरकार की आलोचना करने अथवा प्रत्यक्ष रूप से कानूनी संसाधनों का इस्तेमाल कर असंतोष व्यक्त करने की हिम्मत करने वाले नागरिकों को क्रूर दंड देने के ‘बुलडोजर न्याय’ का विचार अब देश के कई प्रदेशों में अपवाद के बजाय नियम बन रहा है ।

इसमें कहा गया है कि दंड न मिलने की भावना और बहुसंख्यक सत्ता का अहंकार है जो संवैधानिक मूल्यों और सिद्धांतों की अवहेलना को बढ़ा रहा है।

पत्र पर हस्ताक्षर करने वालों में पूर्व केंद्रीय गृह सचिव जी के पिल्लई, पूर्व विदेश सचिव सुजाता सिंह, भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के पूर्व अधिकारी जूलियो रिबेरो, अविनाश मोहनाने, मैक्सवेल परेरा और ए के सामंत तथा पूर्व सामाजिक न्याय सचिव अनीता अग्निहोत्री शामिल हैं।

पूर्व नौकरशाहों ने पत्र में कहा है कि शीर्ष अदालत और उच्च न्यायालयों के कुछ चुनिंदा पूर्व न्यायाधीशों एवं प्रमुख अधिवक्ताओं द्वारा 14 जून 2022 को प्रधान न्यायाधीश को भेजी गई उस याचिका का वे लोग ‘‘पूरी तरह से समर्थन’’ करते हैं, जिसमें उनसे हाल के कृत्यों का स्वत: संज्ञान लेने का अनुरोध किया गया था।

इसमें कहा गया है कि भाजपा के दो पूर्व प्रवक्ताओं द्वारा की गई कुछ कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों के विरोध में उत्तर प्रदेश में लोगों को कथित रूप से अवैध तरीके से हिरासत में रखने, आवासों पर बुलडोजर चलाने और पुलिस हिंसा का मामला सामने आया है ।

पत्र में कहा गया है कि वे लोग मामले में ''तत्काल हस्तक्षेप'' का आग्रह करते हैं ।

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