नयी दिल्ली, 11 अगस्त घरेलू ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों को विदेशी फर्मों समेत विदेशी ठिकानों से लगाये जाने वाले दांव पर 28 प्रतिशत जीएसटी काटने की जरूरत होगी।
इस संदर्भ में एकीकृत जीएसटी (आईजीएसटी) अधिनियम में संशोधन को संसद ने शुक्रवार को मंजूरी दे दी।
माल एवं सेवा कर (जीएसटी) परिषद ने पिछले सप्ताह ऑनलाइन गेमिंग, कसीनो और घुड़दौड़ से संबंधित क्लबों में दांव के पूर्ण अंकित मूल्य पर 28 प्रतिशत कर लगाने के लिये केंद्रीय जीएसटी (सीजीएसटी) और आईजीएसटी कानूनों में बदलाव को मंजूरी दी थी।
आईजीएसटी अधिनियम में संशोधन सरकार को ऐसी वस्तुओं को अधिसूचित करने की शक्ति देता है। इससे ऐसे सामान के आयात के मामले में आईजीएसटी अधिनियम के प्रावधानों के तहत नियमित अंतर-राज्यीय आपूर्ति के रूप में आईजीएसटी लगाने के साथ उसे एकत्र किया जा सकेगा।
कर विशेषज्ञों ने कहा कि इस संशोधन का उद्देश्य विदेशी स्थानों से लगने वाले दांव के मामले में आईजीएसटी संग्रह के संबंध में खामियों को दूर करना है।
वर्तमान में, ऑनलाइन मनी गेमिंग जैसी अमूर्त (भौतिक रूप से उपलब्ध नहीं) वस्तुएं सीमा शुल्क सीमा को पार नहीं करती हैं। उनके आयात के मामले में आईजीएसटी को सीमा शुल्क के माध्यम से एकत्र नहीं किया जा सकता है।
एएमआरजी एंड एसोसिएट्स के वरिष्ठ भागीदार रजत मोहन ने कहा कि सरकार ने कर कानून में संशोधन कर यह प्रावधान किया है कि भारत के बाहर से सट्टेबाजी, जुआ, घुड़दौड़, लॉटरी या ऑनलाइन मनी गेमिंग के लिये पैसा देने वाली अंतरराष्ट्रीय इकाइयों को करों के भुगतान को लेकर घरेलू इकाइयों के समान माना जाएगा।
उन्होंने कहा, ‘‘इससे ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों को भुगतानकर्ता और उसके भुगतान के स्रोत की परवाह किये बिना पूरा कर चुकाना होगा। आईजीएसटी अधिनियम संशोधन के परिणामस्वरूप कानून में एक नया प्रावधान होगा। इससे तकनीकी आधार पर भविष्य में किसी भी कानूनी विवाद को रोकने में मदद मिलेगी।’’
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