देश की खबरें | दिल्ली में हॉर्न बजाने पर जीरो टॉलरेंस की नीति का पालन करें : समिति

नयी दिल्ली, 16 जून दिल्ली में ध्वनि नियमों के अनुपालन की निगरानी के लिए राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) द्वारा गठित एक समिति ने राष्ट्रीय राजधानी सरकार को अनावश्यक हॉर्न बजाने और छेड़छाड़ किये गये साइलेंसर के इस्तेमाल के खिलाफ किसी प्रकार की सहिष्णुता न दिखाने (जीरो टॉलरेंस) की नीति अपनाने का सुझाव दिया है।

समिति ने एनजीटी को सौंपी गई एक रिपोर्ट में कहा है कि लगातार यातायात शोरगुल, निरंतर हॉर्न बजाना, प्रेशर हॉर्न और छेड़छाड़ किये गये साइलेंसर ध्वनि प्रदूषण में प्रमुख रूप से योगदान करते हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है, ‘‘अनावश्यक हॉर्न बजाने और छेड़छाड़ किये गये साइलेंसर के उपयोग के मामले में शून्य-सहिष्णुता नीति का पालन किया जाना चाहिए।’’

पैनल ने न्यायाधिकरण को बताया कि दिल्ली यातायात पुलिस ने एक जनवरी से 31 मार्च के बीच प्रेशर हॉर्न के इस्तेमाल के खिलाफ 331, साइलेंट जोन में हॉर्न बजाने के खिलाफ 30, छेड़छाड़ किये गये साइलेंसर के इस्तेमाल के खिलाफ 773 और वाहनों में तेज संगीत बजाने के लिए 59 चालान किए हैं।

समिति ने नोडल अधिकारी हौज खास के सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट को दिल्ली में शोर नियमों के अनुपालन की निगरानी करने, छेड़छाड़ वाले साइलेंसर और प्रेशर हॉर्न की अवैध बिक्री को बाजारों में रोकने के लिए प्रस्ताव तैयार करने और पेश करने के लिए भी कहा है।

समिति ने धार्मिक स्थानों पर एम्प्लीफायर और लाउडस्पीकर से होने वाले ध्वनि प्रदूषण पर रोक के लिए सलाह दी है कि ध्वनिविस्तारक यंत्रों के स्व-नियमन के लिए धार्मिक संस्थानों के पदाधिकारियों के साथ स्थानीय निकायों और पुलिस स्टेशन प्रभारियों द्वारा नियमित बैठकें आयोजित की जानी चाहिए।

समिति के सुझाव पर, दिल्ली सरकार ने ध्वनि प्रदूषण फैलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए नगर निकायों के अधिकारियों को सशक्त बनाने का प्रस्ताव दिया है।

दिल्ली पर्यावरण विभाग ने ध्वनि प्रदूषण नियमों के तहत उल्लंघन करने वालों पर मुकदमा चलाने के लिए एसएचओ को एक प्राधिकरण के रूप में नामित करने के लिए केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय को एक प्रस्ताव भी प्रस्तुत किया है।

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)