हरदा, सात फरवरी मध्य प्रदेश के हरदा शहर में एक पटाखा कारखाने में विस्फोट और आग में अपने माता-पिता को खोने वाली एक महिला ने कहा कि ऐसी इकाई को आवासीय क्षेत्र में संचालित नहीं किया जाना चाहिए था और यह त्रासदी तो होनी ही थी।
उन्होंने मंगलवार की घटना के लिए सरकार और कारखाने के मालिक को जिम्मेदार ठहराया। इस हादसे में 11 लोगों की जान चली गई और 200 से अधिक लोग घायल हुए हैं।
एक अन्य महिला ने सड़क पर रात बिताई क्योंकि घटना में उसका घर क्षतिग्रस्त हो गया है।
इलाके में रहने वाले एक व्यक्ति ने कहा कि उन्होंने इलाके से पटाखा इकाई को हटाने की मांग की थी लेकिन उनकी मांग पर कोई ध्यान नहीं दिया गया।
हरदा शहर के बाहरी इलाके मगरधा रोड पर बैरागढ़ इलाके में स्थित इकाई में 200 से अधिक लोग पटाखे बनाने के काम में लगे हुए थे। मंगलवार सुबह करीब 11 बजे लोगों ने कारखाने में पहला विस्फोट सुना।
कारखाने के आसपास के इलाके में अफरा-तफरी मच गई क्योंकि लोग भागने लगे और सुरक्षित स्थान पर पहुंचने के लिए संघर्ष करने लगे।
विस्फोट से पटाखा इकाई मलबे में तब्दील हो गई, शवों के टुकड़े चारों ओर दूर दूर तक बिखर गए, घर मलबे में तब्दील हो गए।
विस्फोट स्थल से लगभग 50 फुट दूर एक जला हुआ और पलटा हुआ ट्रक पड़ा देखा गया।
हादसे में अपनी मां और पिता को खोने वाली नेहा ने पीटीआई- को रुंधी आवाज में बताया, '' कारखाने और गोदाम का विस्तार कार्य चल रहा था। यह तो होना ही था।'' उसका परिवार कारखाने के आसपास ही रहता है।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)













QuickLY