देश की खबरें | भंडारा अस्पताल में आग : काली दीवारें आग की भयावहता बताती हैं, पूर्व मंत्री ने लापरवाही का आरोप लगाया

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. महाराष्ट्र के एक पूर्व मंत्री ने आरोप लगाया है कि यहां एक अस्पताल में आग लगने की घटना में मारे गये दस शिशुओं में से कुछ के परिजनों ने बिजली के वोल्टेज में उतार-चढ़ाव की शिकायत की थी लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। वैसे वार्ड में काली हो चुकी दीवारें और जले हुए फर्नीचर शुक्रवार की रात को लगी आग की भयावहता बयां करते हैं।

एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

भंडारा (महाराष्ट्र), नौ जनवरी महाराष्ट्र के एक पूर्व मंत्री ने आरोप लगाया है कि यहां एक अस्पताल में आग लगने की घटना में मारे गये दस शिशुओं में से कुछ के परिजनों ने बिजली के वोल्टेज में उतार-चढ़ाव की शिकायत की थी लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। वैसे वार्ड में काली हो चुकी दीवारें और जले हुए फर्नीचर शुक्रवार की रात को लगी आग की भयावहता बयां करते हैं।

मीडिया को दूर रखने के लिए अस्पताल पहुंचने वाले मार्ग पर अवरोधक लगा दिये गये हैं। अस्पताल के आसपास लोगों की भीड़ नजर आयी जो उन 10 शिशुओं के बारे में जानने के लिए परेशान नजर आये। शुक्रवार देर रात इस अस्पताल की विशेष नवजात देखभाल इकाई में आग लगने से एक से तीन महीने के 10 शिशुओं की मौत हो गई ।

भंडारा में जितनी भयावह घटना हुई है, उसे लेकर शहर के लोग हलकान हैं और समाज के विभिन्न वर्गों के लोग शोक व्यक्त कर रहे हैं।

अस्पताल में पूर्व और वर्तमान मंत्रियों समेत नेताओं को आने-जाने दिया जा रहा है। उनके अलावा बमुश्किल ही किसी को जाने दिया जा रहा था। अस्पताल के अधिकारियों ने इस त्रासदी के बारे में चुप्पी साध रखी है।

चिंता बढ़ने के बीच केवल वे लोग ही संवाददाताओं के लिए अस्पताल में घटी घटना के बारे में थोड़ी-बहुत सूचनाएं हासिल करने का एकमात्र जरिया हैं जिन्हें अंदर जाने दिया गया।

महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री एवं भाजपा नेता चंद्रशेखर बावनकुले ने दावा किया कि आग लगने की घटना में मृत बच्चों के रिश्तेदारों ने संबंधित वार्ड में पिछले सात दिनों से बिजली के वोल्टेज में हो रहे उतार-चढ़ाव के बारे में अस्पताल प्रशासन को जानकारी दी थी लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गयी।

बावनकुले ने ‘पीटीआई-’ से कहा, ‘‘मैंने मृत शिशुओं के रिश्तेदारों से बात की। उन्होंने बताया कि अस्पताल के उस वार्ड में पिछले सात दिनों से बिजली के वोल्टेज में उतार-चढ़ाव हो रहा था। इन रिश्तेदारों ने अस्पताल के कर्मियों से इलेक्ट्रिक स्वीच आदि की जांच करने का अनुरोध किया लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गयी।’’

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