नयी दिल्ली, 20 जून जामिया मिल्लिया इस्लामिया में कथित यौन उत्पीड़न के एक मामले में प्राथमिकी दर्ज की गई है। ऑल इंडिया स्टूडेंट एसोसिएशन (आइसा) ने दावा किया है कि शिकायतकर्ता और छात्र संगठन के सदस्यों द्वारा मामले को आगे बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयास के बाद कार्रवाई हुई है।
छात्र संगठन ने विश्वविद्यालय के भीतर संस्थागत जवाबदेही और ढांचागत सुधारों की मांग की है।
जामिया प्रशासन ने आरोपों या जांच पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया जारी नहीं की है। आइसा के अनुसार, यह मामला एक महिला संकाय सदस्य द्वारा लगाए गए आरोपों से जुड़ा है, जिसे पिछले तीन महीनों में यौन उत्पीड़न, पेशेवर अपमान और धमकी के कई मामलों का सामना करना पड़ा है। आइसा ने कहा कि प्रशासनिक चैनल के माध्यम से निवारण की कई कोशिशों के बावजूद, प्रतिशोध के तहत उसकी शिकायत को कथित तौर पर नजरअंदाज, खारिज कर दिया गया।
अपने बयान में, आइसा ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने आरोपी को बचाया, औपचारिक शिकायतों को दबाया और एक असुरक्षित और शत्रुतापूर्ण कार्य वातावरण बनाया।
छात्र संगठन ने दावा किया कि पीड़िता पर अपनी शिकायत के कुछ हिस्सों को वापस लेने के लिए दबाव डाला गया, वरिष्ठ प्रशासकों से मिलने से मना किया गया और अंततः, ‘ब्लैकलिस्ट’ करने की धमकी के तहत इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया गया।
आइसा ने कहा कि 15 जून को पुलिस में शिकायत दर्ज कराने के प्रयास में शिकायतकर्ता को शुरू में प्रतिरोध का सामना करना पड़ा, लेकिन लगातार प्रयास के बाद 17 जून को आधिकारिक तौर पर प्राथमिकी दर्ज की गई।
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने ‘पीटीआई-’ से पुष्टि की है कि प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है और ‘‘जांच जारी है।’’ मामले में अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है।
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