ताजा खबरें | वित्त चर्चा चार अंतिम रास
Get latest articles and stories on Latest News at LatestLY. उन्होंने परमार्थ संस्थाओं एवं न्यास के बारे में बजट के प्रावधानों का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि इसी तरह चलता रहा तो एक दिन ऐसा आएगा कि परमार्थ संस्थाएं कहेंगी कि वे आयकर के शिकंजे से मुक्त होना चाहती हैं। उन्होंने कहा कि ‘‘आप इन प्रावधानों के जरिये परमार्थ का गला मत घोटिए।’’
उन्होंने परमार्थ संस्थाओं एवं न्यास के बारे में बजट के प्रावधानों का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि इसी तरह चलता रहा तो एक दिन ऐसा आएगा कि परमार्थ संस्थाएं कहेंगी कि वे आयकर के शिकंजे से मुक्त होना चाहती हैं। उन्होंने कहा कि ‘‘आप इन प्रावधानों के जरिये परमार्थ का गला मत घोटिए।’’
उन्होंने कर दाता एवं कर अधिकारी के आमने सामने आए बिना कर निर्धारण संबंधी प्रावधान का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्हें कई लोगों ने शिकायत की है कि इससे बहुत सारी कठिनाइयां आ रही हैं। उन्होंने कहा कि करदाता को यह नहीं मालूम चलता कि अधिकारी कौन है और वह किन दस्तावेजों के आधार पर कर आकलन कर रहा है?
पूर्व वित्त मंत्री ने इसे पीछे की ओर ले जाने वाला कदम बताया।
उन्होंने कहा कि 2013-14 में सकल घरेलू उत्पाद का 5.6 प्रतिशत प्रत्यक्ष कर और 4.4 प्रतिशत अप्रत्यक्ष कर संग्रह था। उन्होंने कहा कि यह प्रगतिशील कराधान था और यह रुख 2016-17 तक जारी रहा किंतु इसी समय प्रत्यक्ष करों की तुलना में अप्रत्यक्ष करों का संग्रह बढ़ गया। उन्होंने कहा कि इस बार के बजट आंकड़ों से पता चलता है कि प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष कर समान स्तर पर आ गये हैं जो 5.4 प्रतिशत है।
चिदंबरम ने कहा कि वित्त मंत्री ने बजट में अनुमान जताया कि अगले वित्त वर्ष में प्रत्यक्ष कर संग्रह जीडीपी का 5.5 प्रतिशत और अप्रत्यक्ष कर घटकर 5.2 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
उन्होंने कहा कि यह अच्छा बदलाव होगा। उन्होंने कहा कि देश को अपने कर को जीडीपी के मुकाबले बढ़ाना होगा। उन्होंने कहा कि यदि यह नहीं बढ़ता है तो इसका मतलब है कि जो लोग संपदा बना रहे हैं किंतु समुचित कर नहीं दे रहे हैं और शेष लोगों को अप्रत्यक्ष कर के रूप में इसका बोझ उठाना पड़ रहा है।
उन्होंने सरकार से कहा कि ऊंचे विकास के लिए देश के निवेशकों को निवेश के लिए उत्साहित करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि क्या निजी निवेशकों ने देश में निवेश करने का भरोसा खो दिया है या सरकार ने देश के निजी निवेशकों पर भरोसा खो दिया।
राष्ट्रीय जनता दल के मनोज कुमार झा ने कहा कि उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लोकप्रियता के मामले में विश्व में सबसे आगे हैं किंतु देश भूख सूचकांक में बहुत नीचे चला गया है।
उन्होंने कहा कि देश में जिस प्रकार से सार्वजनिक उपक्रमों को बेचा जा रहा है, उसे देखते हुए वह यह कह सकते हैं कि एक दिन सारे दलों को इस बात के लिए मर्सिया पढ़ना पड़ेगा कि देश के सारे सार्वजनिक उद्यम हाथ से निकल गये।
असम गण परिषद के वीरेंद्र प्रसाद वैश्य ने वित्त विधेयक की घोषणाओं का स्वागत करते हुए कहा कि सरकार को पूर्वोत्तर क्षेत्र पर विशेष ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने इस क्षेत्र के लिए बहुत पहल की हैं जिनका लाभ क्षेत्र को मिल रहा है।
वित्त विधेयक पर चर्चा अधूरी रही।
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