देश की खबरें | फिल्मकार कसीनथुनी विश्वनाथ का निधन

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हैदराबाद, तीन फरवरी दादा साहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित मशहूर फिल्मकार कसीनथुनी विश्वनाथ का हैदराबाद में एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। वह 92 वर्ष के थे।

सूत्रों ने बताया कि विश्वनाथ काफी समय से बीमार थे, उन्हें उम्र संबंधी पेरशानियां थीं। बृहस्पतिवार देर रात उन्होंने अस्पताल में अंतिम सांस ली।

‘कलातपस्वी’ के नाम से मशहूर विश्वनाथ का जन्म फरवरी 1930 में आंध्र प्रदेश में हुआ था।

तेलुगु सिनेमा के अलावा तमिल और हिंदी फिल्मों में भी उन्होंने काफी लोकप्रियता हासिल की। वह दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किए गए 48वें शख्स थे। भारतीय सिनेमा में इस पुरस्कार को सर्वोच्च सम्मान माना जाता है। उन्हें 2016 में दादा साहब फाल्के पुरस्कार दिया गया था।

तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वाई. एस. जगन मोहन रेड्डी, पूर्व उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने विश्वनाथ के निधन पर शोक व्यक्त किया है।

बतौर ‘साउंड आर्टिस्ट’ अपने करियर की शुरुआत करने वाले विश्वनाथ ने ‘शंकराभरणम’, ‘सागर संगमम’, ‘स्वाति मुत्यम’, ‘सप्तपदी’, ‘कामचोर’, ‘संजोग’ और ‘जाग उठा इंसान’ जैसी हिट फिल्मों का निर्देशन किया जिन्होंने कई पुरस्कार भी अपने नाम किए।

अपने शानदार करियर में उन्हें 1992 में पद्म श्री, पांच बार राष्ट्रीय पुरस्कार, 20 नंदी पुरस्कार (आंध्र प्रदेश सरकार द्वारा दिए जाने वाला पुरस्कार) और ‘लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार’ सहित 10 फिल्मफेयर भी मिले।

विश्वनाथ ने 1965 से लेकर करीब 50 फिल्में बनाईं। तेलुगु फिल्म उद्योग के एक प्रसिद्ध फिल्म निर्माता होने के साथ ही उन्होंने तमिल और हिंदी सिनेमा के लिए भी काम किया।

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