जरुरी जानकारी | एफआईडीसी ने छोटी, मझोले आकार की गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों के लिये समर्पित कोष की मांग की

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) के एक प्रतिनिधि संगठन वित्त उद्योग विकास परिषद (एफआईडीसी) ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को पत्र लिखकर नकदी संकट से जूझ रहे छोटे व मध्यम आकार के एनबीएफसी को कर्ज देने के लिये नाबार्ड या सिडबी को एक समर्पित कोष आवंटित करने की मांग की है।

मुंबई, 17 जुलाई गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) के एक प्रतिनिधि संगठन वित्त उद्योग विकास परिषद (एफआईडीसी) ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को पत्र लिखकर नकदी संकट से जूझ रहे छोटे व मध्यम आकार के एनबीएफसी को कर्ज देने के लिये नाबार्ड या सिडबी को एक समर्पित कोष आवंटित करने की मांग की है।

संगठन ने यह भी अनुरोध किया है कि यह कोष सावधि ऋण के रूप में दिया जाना चाहिये, जिनकी परिपक्वता अवधि तीन से पांच साल हो।

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उसने कहा कि सरकार ने गैर-बैंकिंग क्षेत्र को तरलता सहायता प्रदान करने के लिए विभिन्न उपायों की घोषणा की है, लेकिन छोटे और मध्यम आकार के एनबीएफसी के लिये स्थिति में बहुत बदलाव नहीं हुआ है। उन्हें धन जुटाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के पास पंजीकृत गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों की कुल संख्या का 90 प्रतिशत से अधिक छोटे और मध्यम आकार के एनबीएफसी हैं।

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एफआईडीसी ने पत्र में कहा, "छोटे और मध्यम एनबीएफसी के लिये समर्पित एक कोष को सिडबी, नाबार्ड जैसे वित्तीय संस्थानों को आवंटित किया जा सकता है। इन वित्तीय संस्थानों को तीन से पांच साल की परिपक्वता अवधि के साथ वित्त पोषण मुहैया कराना चाहिये।’’

पत्र में कहा गया कि एनबीएफसी के लिये सरकार और आरबीआई द्वारा घोषित हाल के उपायों का उद्देश्य बैंकिंग चैनलों के माध्यम से धन उपलब्ध कराना है। हालांकि, पिछले दो वर्षों में यह स्पष्ट रूप से दिखा है कि जब एनबीएफसी को वित्त पोषण मुहैया कराने की बात आती है तो बैंक जोखिम को लेकर कतराते हैं।

एफआईडीसी ने कहा, "आंशिक ऋण गारंटी योजना 1.0, टीएलटीआरओ 1.0 और 2.0 बैंकों के जोखिम से कतराने के कारण वांछित परिणाम नहीं दे सकी। इस कारण बैंकों के अलावा अन्य स्रोतों से भी धन उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण है।"

छोटे और मध्यम आकार के एनबीएफसी की पहुंच पूंजी बाजार तक नहीं होती है और इस कारण वे बांड या वाणिज्यिक पत्र (सीपी) जारी नहीं करते हैं। वे बैंकों और वित्तीय संस्थानों से सावधि ऋण के माध्यम से फंड जुटाते हैं।

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