जरुरी जानकारी | आईबीसी लागू होने के बाद कॉरपोरेट कर्जदारों का सामंतवाद खत्म हुआ: सीईए
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नयी दिल्ली, 27 अगस्त मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) के वी सुब्रमण्यन ने शुक्रवार को कहा कि दिवाला कानून लागू होने के बाद कॉरपोरेट कर्जदारों का सामंतवाद खत्म हो गया, जहां वह कंपनियों पर अपने नियंत्रण को दैवीय अधिकार मानते थे।
दिवाला एवं रिण शोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी), जो 2016 में लागू हुआ था, तनावग्रस्त परिसंपत्तियों के मुद्दे का समयबद्ध समाधान करती है। तनावग्रस्त कंपनी के आईबीसी के तहत समाधान के लिए आने के बाद रिणदाताओं की समिति (सीओसी) प्रभारी होती है और कंपनी के मामलों का प्रबंधन एक समाधान पेशेवर द्वारा किया जाता है।
सुब्रमण्यन ने कहा, ‘‘आईबीसी से पहले सामंतवाद हुआ करता था, जहां कॉरपोरेट कर्जदार कंपनियों पर नियंत्रण को अपना दैवीय अधिकार मानता था... अब ये एकदम साफ है कि वो दिन चले गए हैं। वह सामंतवाद अब वापस नहीं आने जा रहा... सामंतवाद कभी अच्छा नहीं होता, बल्कि पूंजीवादी व्यवस्था में सामंतवाद शायद सबसे खराब है।’’
उन्होंने उद्योग मंडल सीआईआई द्वारा ‘आईबीसी के 5 साल- 2016 और उसके आगे’ पर आयोजित एक सम्मेलन में कहा कि आईबीसी या कोई भी अन्य व्यवस्था अक्षमता की स्थिति में फंस जाती है, जब उसके प्रत्येक घटक अपने कमतर काम को यह कहकर सही ठहराता है कि बाकी सब भी कमतर काम कर रहे हैं, इसलिए उसका काम भी उसी कमतर स्तर पर है।
सुब्रमण्यन ने कहा कि उनके अनुसार धर्म की पूरी अवधारणा एक बहुत बड़े लक्ष्य पर आधारित है, और यदि आप एक अर्थशास्त्री के नजरिए से सोचते हैं, तो धर्म वास्तव में सामाजिक रूप से ईष्टतम को पाने की अवधारणा है।
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