देश की खबरें | ‘अवैध प्रवासी’ घोषित किए जाने से किसान दंग, नोटिस पर राजनीतिक घमासान शुरू

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. पश्चिम बंगाल के दिनहाटा निवासी 50 वर्षीय किसान को असम के विदेशी न्यायाधिकरण द्वारा कथित तौर पर अवैध प्रवासी घोषित किए जाने के नोटिस भेजे जाने के मामले ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बीच राजनीतिक वाकयुद्ध पैदा कर दिया है।

कूच बिहार (पश्चिम बंगाल), सात जुलाई पश्चिम बंगाल के दिनहाटा निवासी 50 वर्षीय किसान को असम के विदेशी न्यायाधिकरण द्वारा कथित तौर पर अवैध प्रवासी घोषित किए जाने के नोटिस भेजे जाने के मामले ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बीच राजनीतिक वाकयुद्ध पैदा कर दिया है।

कूचबिहार जिले में दिनहाटा उपखंड के सदयालर कुठी निवासी उत्तम कुमार ने कहा कि इस साल की शुरुआत में उन्हें ‘1966 - 1971 के बीच असम के रास्ते कथित तौर पर अवैध रूप से देश में प्रवेश करने’ के लिए नोटिस भेजा गया, जिससे वह दंग रह गए।

उत्तम ने पत्रकारों से कहा, ‘‘मैं अपने जीवन में कभी कूचबिहार से बाहर नहीं गया। मैं यहीं पैदा हुआ और यहीं पला-बढ़ा हूं। मैं अवैध प्रवासी कैसे हो सकता हूं?’’

उत्तम एक किसान है जो अपना और अपने परिवार का पेट पालने के लिए संघर्ष करता है।

उन्होंने कहा, ‘‘मुझे जनवरी में नोटिस भेजा गया था। मैं ठीक से पढ़ नहीं पाता, इसलिए मैंने इसे अपने पड़ोसियों को दिखाया। तब मुझे पता चला कि असम ने मुझ पर अवैध घुसपैठिया होने का आरोप लगाया है।’’

फिलहाल विदेशी न्यायाधिकरण एकमात्र असम में कार्यरत है और इसका काम यह निर्धारित करना है कि क्या विदेशी होने का संदेह वाले व्यक्ति वास्तव में भारतीय नागरिक हैं।

सत्तारूढ़ टीएमसी ने आरोप लगाया कि यह ‘भाजपा के बंगाली विरोधी’ रवैये का एक और सबूत है।

उत्तर बंगाल विकास मंत्री उदयन गुहा ने कहा, ‘‘असम समझौते के अनुसार ब्रह्मपुत्र बेसिन के सभी निवासी, जो 1971 से पहले यहां आ गए थे वो सभी भारतीय नागरिक हैं। अगर हम यह भी मान लें कि कोई व्यक्ति 1971 से पहले यहां आया था, तो भी वह वैध भारतीय है।’’

तृणमूल ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा, ‘‘कूचबिहार के दिनहाटा निवासी को असम के विदेशी न्यायाधिकरण द्वारा अपराधी की तरह खोजा जा रहा है। हर वैध पहचान पत्र प्रस्तुत करने के बावजूद, उन्हें परेशान किया जा रहा है और 1966 से 2008 के बीच हर चुनाव की मतदाता सूची मांगी जा रही है। राज्य सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि एनआरसी की आड़ में लोगों को परेशान करने वालों के लिए बंगाल में कोई जगह नहीं है...।’’

हालांकि, भाजपा ने आरोपों को खारिज कर दिया और पहचान दस्तावेज को लेकर भ्रम की स्थिति के लिए ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली राज्य सरकार को जिम्मेदार ठहराया।

भाजपा की बंगाल इकाई के एक नेता ने कहा, ‘‘एक-दो छिटपुट मामले हो सकते हैं। लेकिन हम इस स्थिति के लिए ममता बनर्जी सरकार को जिम्मेदार मानते हैं। असली नागरिकों और जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल करने वालों के बीच की रेखाएं तेजी से धुंधली होती जा रही हैं।’’

माथाभांगा से भाजपा विधायक सुशील चंद्र बर्मन ने भी राज्य प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाया।

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)

Share Now

संबंधित खबरें

GT vs MI, IPL 2026 30th Match Date And Time: कब और कितने बजे से खेला जाएगा गुजरात टाइटंस बनाम मुंबई इंडियंस के बीच रोमांचक मुकाबला? इस स्टेडियम में भिड़ेंगी दोनों टीमें, यहां जानें वेन्यू समेत मैच से जुड़ी सभी जानकारी

PBKS vs LSG, IPL 2026 29th Match Scorecard: चंडीगढ़ मुकाबले में पंजाब किंग्स ने लखनऊ सुपर जायंट्स को 54 रनों दी पटखनी, लगाया जीत का पंजा; यहां देखें मैच का स्कोरकार्ड

Will MS Dhoni Play in MI vs CSK IPL 2026 Match: मुंबई इंडियंस बनाम चेन्नई सुपरकिंग्स के मुकाबले से पहले बड़ी खबर, क्या आईपीएल 2026 में वापसी करेंगे एमएस धोनी? फिटनेस को लेकर आया अपडेट

Manipur Tension: मणिपुर में फिर बढ़ा तनाव, उखरुल में पूर्व सैनिक समेत दो की हत्या से हालात बिगड़े; संदिग्ध उग्रवादियों पर FIR दर्ज