देश की खबरें | परिवारवाद की राजनीति जहर है: अमित शाह

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भोपाल, 20 अगस्त केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को परिवारवाद की राजनीति को ''जहर'' करार देते हुए कहा कि इस व्यवस्था के तहत किसी पार्टी और उसके नेतृत्व वाली सरकार पर नियंत्रण एक ही परिवार के हाथ में रहता है।

शाह ने समाजवादी पार्टी (सपा), कांग्रेस, द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) और उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) पर परिवारवादी राजनीति में शामिल होने का आरोप लगाया।

शाह ने कांग्रेस पर 2015 के बाद से मध्य प्रदेश और कुछ अन्य राज्यों में "जातिवाद का जहर फैलाने" के लिए "जाति आधारित आंदोलनों" को प्रायोजित करने का भी आरोप लगाया। उन्होंने इसे 2018 में मप्र विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की हार का कारण बताया।

शाह मप्र की अपनी एक दिवसीय यात्रा के दौरान यहां पत्रकारों से बात कर रहे थे। अपनी यात्रा के दौरान उन्होंने वर्ष 2003 से 2023 तक मध्य प्रदेश सरकार का 'रिपोर्ट कार्ड' जारी किया। मप्र में इस साल के अंत में विधानसभा चुनाव होने हैं।

एक सवाल का उत्तर देते हुए शाह ने कहा, ‘‘ मैं किसी नेता का नाम नहीं लेना चाहता, लेकिन कांग्रेस, सपा, द्रमुक, शिवसेना (यूबीटी) की परिवारवादी राजनीति का मतलब है कि पार्टी और सरकार में केवल एक ही परिवार के सदस्य आएंगे। इसे ही परिवारवादी राजनीति कहा जाता है।"

भाजपा नेताओं के परिवार के सदस्यों को टिकट देने का बचाव करते हुए शाह ने कहा, "कहीं-कहीं कुछ लोगों को योग्यता के आधार पर टिकट दिए गए हैं। ऐसा कहकर परिवारवादी राजनीति के मुद्दे को कमजोर ना करें...यह जहर है। जब दल एक परिवार की जागीर बन जाएंगे तो जमीनी स्तर से आने वालों के लिए क्या जगह होगी?’’

उन्होंने कहा, ‘‘ पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की कोई राजनीतिक पारिवारिक पृष्ठभूमि नहीं थी। मैं पार्टी का अध्यक्ष बन गया, मेरे परिवार में कोई भी राजनीति में नहीं था। भाजपा प्रमुख जेपी नड्डा जी के परिवार की कोई राजनीतिक पृष्ठभूमि नहीं है। मप्र के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान जी की पृष्ठभूमि क्या है?”

उन्होंने कहा, ‘‘ कांग्रेस के एजेंडे को घुमा फिराकर क्रांति खड़ी मत करिए। परिवारवाद बहुत स्पष्ट है, पार्टी और सत्ता पर नियंत्रण एक परिवार के हाथ में रहना। उसको परिवारवाद कहते हैं।’’

यह पूछे जाने पर कि अगर साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनाव के बाद भाजपा सत्ता बरकरार रखती है तो क्या चौहान मुख्यमंत्री बने रहेंगे। इसके जवाब में शाह ने कहा, "आप पार्टी का काम क्यों कर रहे हैं? हमारी पार्टी अपना काम करेगी। शिवराज जी मुख्यमंत्री हैं और हम चुनाव में हैं...मोदी जी और शिवराज जी के विकास कार्यों को जनता के बीच ले जाएं। अगर कांग्रेस ने कोई विकास किया है तो उसे भी उजागर करें।”

कर्नाटक और हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव में पार्टी की हार के मद्देनजर मध्य प्रदेश में भाजपा की संभावनाओं के बारे में पूछे गए सवाल के जवाब में शाह ने मणिपुर, असम और उत्तर प्रदेश का उदाहरण दिया, जहां पार्टी ने लगातार चुनाव जीते और मोदी के नेतृत्व में केंद्र में भी जीत हासिल की।

शाह ने कहा, ‘‘हम हार का सामना करके एक पार्टी बन गए हैं। 1950 में हमारे पास कुछ भी नहीं था, लेकिन अब पंचायत से संसद तक हमारी जीत की दर सबसे अच्छी है। यह हमारे नेता नरेन्द्र मोदी थे, जिन्होंने 30 साल के अंतराल के बाद दो बार पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई।’’

जब उनसे कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह द्वारा भाजपा पर लगाए गए आरोपों के बारे में पूछा गया कि मध्य प्रदेश में भी नूंह (हरियाणा) की तरह दंगे भड़काए जाएंगे, तो शाह ने कहा, "उनके मन में जो है, वह उनके मुंह से निकल रहा है। एक माह बाद दिग्विजय सिंह से पूछिएगा कि दंगे क्यों नहीं हुए।”

मप्र भाजपा सरकार का रिपोर्ट कार्ड जारी करने से पहले अपने संबोधन में, शाह ने आरोप लगाया कि कांग्रेस शासन के तहत 2जी, कोयला, सत्यम, आदर्श और एलआईसी हाउसिंग सहित 24 अलग-अलग घोटाले हुए और इस बारे में कांग्रेस और मप्र कांग्रेस प्रमुख कमलनाथ से जवाब मांगा।

इन घोटालों में कांग्रेस नेताओं और कमलनाथ के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने के सवाल के जवाब में शाह ने कहा, ''हम राजनीतिक प्रतिशोध के आधार पर कार्रवाई नहीं करते हैं। मैंने जितने भी घोटालों का जिक्र किया है, उनकी जांच की जा रही है। कांग्रेस और अन्य नेताओं के भाषणों में आपको जांच एजेंसियों के दुरुपयोग की हाय तौबा देखने को मिलेगी।’’

उन्होंने कहा, "लेकिन जांच अपनी गति से और नियमों के मुताबिक होती है। अगर यह सवाल कमलनाथ की ओर से पूछा जा रहा है तो उन्हें ऐसी कोई गलती नहीं करनी चाहिए। इससे जांच की गति बढ़ सकती है।"

मप्र में पिछले विधानसभा चुनाव में हार की वजह के बारे में पूछे जाने पर शाह ने कहा कि कांग्रेस ने जातिवाद का जहर फैलाने के लिए 2015 से मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान और अन्य राज्यों में जाति आधारित आंदोलन शुरू किया था।

उन्होंने कहा, ‘‘2018 का विधानसभा चुनाव जातिवाद के साये में हुआ, लेकिन भाजपा को विपक्षी दल से करीब एक लाख वोट ज्यादा मिले। इस बार लोगों ने कांग्रेस का 15 महीने का शासन (दिसंबर 2018 से मार्च 2020 तक) देखा है और तुलनात्मक विश्लेषण कर सकते हैं।’’

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भाजपा चाहती है कि चुनाव विकास के एजेंडे पर लड़ा जाए।

चुनाव से पहले राजनीतिक दलों द्वारा मुफ्त सुविधाओं की घोषणा के बारे में एक सवाल के जवाब में शाह ने कहा कि मुफ्त आवास और बिजली जैसी भाजपा सरकार की कल्याणकारी योजनाएं बहुत पहले शुरू की गई थीं।

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