देश की खबरें | नेपाल में लापता पर्वतारोही के मिलने से परिवार ने ली राहत की सांस ली

जयपुर, 20 अप्रैल नेपाल के अन्नपूर्णा पर्वत से एक गहरी हिम दरार में गिरने के बाद सोमवार से लापता भारतीय पर्वतारोही अनुराग मालू बचावकर्ताओं को जिंदा मिले हैं। इस खबर से राजस्‍थान में उसके परिवार के लोगों ने राहत की सांस ली है।

मालू के परिजनों के अनुसार उसे नई जिंदगी म‍िली है हालांक‍ि उसकी गंभीर स्‍वास्‍थ्‍य स्थिति को लेकर वे अब भी चिंतित हैं। परिजनों के अनुसार गंभीर अवस्‍था में म‍िले मालू का नेपाल के एक अस्‍पताल में इलाज चल रहा है।

अजमेर जिले के किशनगढ़ कस्बे के रहने वाले अनुराग मालू (34) नेपाल के अन्नपूर्णा पर्वत से एक गहरी हिम दरार में गिरने के बाद सोमवार से लापता हो गए थे। वह सोमवार को कैंप-3 से उतरते वक्त करीब 6,000 मीटर की ऊंचाई से गिर गए थे। अन्नपूर्णा पर्वत दुनिया की 10वीं सबसे ऊंची पर्वत चोटी है।

मालू के लापता होने के बाद से किशनगढ़ विधायक सुरेश टांक कस्बे के मालू परिवार से लगातार संपर्क में थे। उन्होंने आज भी जाकर उसके पिता ओमप्रकाश व परिवार के अन्य सदस्यों से मुलाकात की। उनके कई रिश्तेदार, दोस्त और स्थानीय लोग किशनगढ़ स्थित आदित्य मिल कॉलोनी स्थित उनके घर पहुंचे।

विधायक ने कहा, 'अनुराग के लापता होने के बाद से पूरा परिवार दहशत में था। उसके चाचा और चचेरे भाई तुरंत नेपाल के लिए रवाना हो गए और उसे खोजने और बचाने के लिए सभी प्रयास किए गए।”

उन्होंने कहा, 'मैंने नेपाल में बचाव अभियान के लिए 60 लाख रुपये की सहायता प्रदान करने के लिए कल मुख्यमंत्री को भी लिखा था। हालांकि, केंद्र सरकार की ओर से सहायता प्रदान कर दी गई गई।'

टांक ने कहा कि उनके पिता और परिवार के अन्य सदस्य गहरे सदमे थे और उनके लिए अनुराग सोमवार से एक "लापता व्यक्ति" था, लेकिन जब अनुराग के चचेरे भाई ने आज सुबह परिवार को फोन किया तो उन्होंने राहत की सांस ली।

उन्होंने कहा, 'आज वे खुश हैं।' हालांकि, परिवार के लोग उसकी स्वास्थ्य की स्थिति को लेकर चिंतित भी हैं और हर कोई उनके जल्द स्वस्थ होने की प्रार्थना कर रहा है।

उन्होंने कहा, "आज सुबह म‍िली प्राथमिक जानकारी के अनुसार अनुराग बेहोश है, लेकिन उसकी नाड़ी ठीक चल रही है।"

परिवार के एक सदस्य ने बताया कि अनुराग ने 2010 में आईआईटी दिल्ली से ग्रेजुएशन किया था। मालू, संयुक्त राष्ट्र के वैश्विक लक्ष्यों को प्राप्त करने और जागरूकता फैलाने के लिए सातों महाद्वीपों के 8,000 मीटर की ऊंचाई वाली सभी 14 पर्वत चोटियों को फतह करने के अभियान पर थे।

उन्हें आरईएक्‍स करम-वीर चक्र से सम्मानित किया गया है और वे भारत से 2041 अंटार्कटिक यूथ एंबेस्‍डर हैं।

पृथ्‍वी

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