नयी दिल्ली, छह जनवरी बिहार क्रिकेट के लिए गुटबाजी कोई नई बात नहीं है और दो दशकों से चली आ रही अंदरूनी कलह के कारण उसे भारतीय क्रिकेट बोर्ड (बीसीसीआई) की नाराजगी का सामना करना पड़ा और साथ ही कुछ अच्छी प्रतिभायें भी राज्य से दूर हो गयीं।
टीम पटना में जन्मे और पले-बढ़े ईशान किशन और गोपालगंज के रहने वाले तेज गेंदबाज मुकेश कुमार की सेवाएं लेने में विफल रही। ये खिलाड़ी क्रमश: झारखंड और बंगाल के लिए खेलकर राष्ट्रीय टीम का हिस्सा बन गये है।
इन दोनों के अलावा कई और खिलाड़ियों ने बेहतर माहौल में क्रिकेट करियर बनाने के लिए दूसरे राज्यों (टीमों) का रुख करना बेहतर समझा।
गुटबाजी की घटना का ताजा मामला शुक्रवार को पटना में सामने आया जब दो टीमें मोइन-उल-हक स्टेडियम में मुंबई के खिलाफ रणजी ट्रॉफी एलीट बी ग्रुप मैच खेलने पहुंची गयी।
इसमें से एक टीम का चयन बिहार क्रिकेट संघ (बीसीए) के सचिव अमित कुमार ने किया और दूसरी टीम का चयन बीसीए अध्यक्ष राकेश तिवारी ने किया।
तिवारी की टीम आखिरकार मैच खेलने में सफल रही। इस टीम की अगुवाई बायें हाथ के अनुभवी स्पिनर आशुतोष अमन कर रहे हैं।
बीसीए के पूर्व अधिकारी और 2013 आईपीएल (इंडियन प्रीमियर लीग) ‘स्पॉट फिक्सिंग’ मामले के मूल याचिकाकर्ता आदित्य वर्मा ने ‘पीटीआई-’ को बताया, ‘‘ सबसे पहले, इस मैच के लिए मोइन-उल-हक स्टेडियम का चयन क्यों किया? राजबंसी नगर के ऊर्जा स्टेडियम में बेहतर सुविधाएं हैं। यह स्टेडियम भी पटना में ही है।’’
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