देश की खबरें | फेसबुक विवाद: थरूर और निशिकांत दुबे ने एक दूसरे के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस दिया

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. कांग्रेस सांसद एवं सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी संसदीय समिति के प्रमुख शशि थरूर और भाजपा के लोकसभा सदस्य निशिकांत दुबे ने फेसबुक प्रकरण के संदर्भ में समिति की बैठक बुलाने को लेकर सोशल मीडिया में चले वाकयुद्ध के बाद बुधवार को एक दूसरे के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस दिया।

एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, 19 अगस्त कांग्रेस सांसद एवं सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी संसदीय समिति के प्रमुख शशि थरूर और भाजपा के लोकसभा सदस्य निशिकांत दुबे ने फेसबुक प्रकरण के संदर्भ में समिति की बैठक बुलाने को लेकर सोशल मीडिया में चले वाकयुद्ध के बाद बुधवार को एक दूसरे के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस दिया।

दुबे कांग्रेस नेता की अध्यक्षता वाली इस स्थायी समिति के सदस्य हैं।

यह भी पढ़े | MSRTC Bus Service: महाराष्ट्र में अंतर जिला बस सेवा कल से फिर होगी शुरू, सरकार की तरफ से मिली इजाजत.

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को लिखे पत्र में थरूर ने दुबे की ओर से ट्विटर पर की गई उस टिप्पणी पर आपत्ति जताई जिसमें भाजपा सांसद ने कहा था कि ‘स्थायी समिति के प्रमुख के पास इसके सदस्यों के साथ एजेंडे के बारे में विचार-विमर्श किए बिना कुछ करने का अधिकार नहीं है।’

थरूर ने कहा, ‘‘निशिकांत दुबे की अपमानजनक टिप्पणी से न सिर्फ सांसद एवं समिति के प्रमुख के तौर पर मेरे पद का अनादर हुआ है, बल्कि उस संस्था का भी अपमान हुआ है जो हमारे देश की जनता की आकांक्षा का प्रतिबिंब है।’’

यह भी पढ़े | Water Level of River Godavari: आंध्र प्रदेश के डोलेश्वरम बैराज में गोदावरी नदी का जल स्तर धीरे-धीरे हो रहा है कम, मंगलवार को 19.78 क्यूसेक पानी छोड़ा गया: देखें VIDEO.

उन्होंने बिरला से आग्रह किया कि दुबे के खिलाफ कार्यवाही आरंभ करने के लिए दिशानिर्देश जारी किए जाएं।

कांग्रेस सांसद ने कहा कि वह इस मामले में सख्त कार्रवाई की उम्मीद करते हैं ताकि आगे से ऐसी घटना नहीं हो।

दूसरी तरफ, भाजपा सांसद दुबे ने लोकसभा अध्यक्ष को सौंपे गए नोटिस में अपने इस रुख को दोहराया कि समिति के सदस्यों के साथ विचार-विमर्श किए बिना किसी इकाई या संगठन को तलब करने का थरूर को कोई अधिकार नहीं है।

उन्होंने दावा किया कि थरूर ने समिति की किसी बैठक में इस विषय से जुड़े एजेंडे के बारे में सदस्यों को सूचित नहीं किया तथा ऐसे में यह स्पष्ट रूप से विशेषाधिकार हनन का मामला बनता है।

दरअसल, थरूर ने फेसबुक से जुड़े विवाद को लेकर रविवार को कहा था कि सूचना प्रौद्योगिकी मामले की स्थायी समित इस सोशल मीडिया कंपनी से इस विषय पर जवाब मांगेगी। इसके बाद दुबे ने उन पर निशाना साधा था।

गौरतलब है कि फेसबुक से जुड़ा पूरा विवाद अमेरिकी अखबार ‘वाल स्ट्रीट जर्नल’ की ओर से शुक्रवार को प्रकाशित रिपोर्ट के बाद आरंभ हुआ। इस रिपोर्ट में फेसबुक के अनाम सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि फेसबुक के वरिष्ठ भारतीय नीति अधिकारी ने कथित तौर पर सांप्रदायिक आरोपों वाली पोस्ट डालने के मामले में तेलंगाना के एक भाजपा विधायक पर स्थायी पाबंदी को रोकने संबंधी आंतरिक पत्र में हस्तक्षेप किया था।

उधर, फेसबुक ने सफाई देते हुए कहा कि उसके मंच पर ऐसे भाषणों और सामग्री पर अंकुश लगाया जाता है, जिनसे हिंसा फैलने की आशंका रहती है। इसके साथ ही कंपनी ने कहा कि उसकी ये नीतियां वैश्विक स्तर पर लागू की जाती हैं और इसमें यह नहीं देखा जाता कि यह किस राजनीतिक दल से संबंधित मामला है।

फेसबुक ने इसके साथ ही यह स्वीकार किया है कि वह घृणा फैलाने वाली सभी सामग्रियों पर अंकुश लगाती है, लेकिन इस दिशा में और बहुत कुछ करने की जरूरत है।

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)

Share Now

\