जरुरी जानकारी | सार्वभौमिक मूलभूत आय के बाद भी संकट में अतिक्त उपाय करने होंगे: व्यय सचिव
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नयी दिल्ली, 15 जुलाई व्यय सचिव टीवी सोमनाथन ने बुधवार को कहा कि कोरोना वायरस महामारी के समय लोगों को सरकार मदद और सार्वभौमिक मूलभूत आय (यूबीआई) की अवधारणा को अलग अलग देखा जाना चाहिए क्योंकि यूबीआई होने के बावजूद सरकार को और कदम उठाने पड़ेंगे।
उन्होंने नेशनल काउंसिल ऑफ एप्लायडउ एकोनोमिक रिसर्च (एनसीएईआर) के कार्यक्रम इंडिया पॉलिसी फोरम, 2020 में कहा, ‘‘महामारी में सरकार से अपपेक्षा होती है कि जो दिया जा रहा है, सरकार उससे कुछ और ज्यादा दे। इसीलिए मैं केवल इतना कह रहा हूं कि यूबीआई को विशेष आपदा या महामारी जैसी घटनाओं से नहीं जोड़ा जाना चाहिए.... क्योंकि महामारी या इस प्रकार की घटनाओं के लिये यह जवाब नहीं बनने जा रहा।’’
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सचिव ने कहा कि जिन देशों में मजबूत सुरक्षा व्यवस्था है और उल्लेखनीय रूप से सार्वभौमिक मूलभूत आय का प्रावधान है, उन्हें भी और कदम उठाने पड़ते हैं।
उन्होंने यह बात ऐसे समय कही है, जब विशेषज्ञ कोविड-19 संकट से प्रभावित लोगों को न्यूनतम आय सुनिश्चित करने को लेकर यूबीआई जैसी व्यवस्था पर जोर दे रहे हैं।
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नोबेल पुरस्कार से सम्मानित अभिजीत बनर्जी ने कहा कि हालांकि यूबीआई कोविड-19 संकट का समाधान सीधे तौर पर नहीं है लेकिन धन भेजने के उपाय के रूप में रास्ता खोलना महत्वपूर्ण है।
एनसीएईआर के इसी कार्यक्रम में आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने कहा कि अर्थव्यवस्था को गति देने के लिये सरकार को लाभदायक कंपनियों पर खर्च को लेकर ध्यान देना चाहिए। ये कंपनियां लागत तो उठा रही हैं लेकिन पिछले चार महीनों से राजस्व अर्जित नहीं कर पायीं।
उन्होंने कहा कि सामान्य मंदी के विपरीत महामारी में काफी नुकसान होता है। यह नुकसान परिवार के स्तर पर और कंपनियों के स्तर पर भी होता है। इसी को देखते हुए प्रोत्साहन पैकेज के साथ राहत उपायों और चीजों को दुरूस्त करने की जरूरत होती है।
जब व्यय सचिव ने पूछा कि उनके हिसाब से चीजों को दूरूस्त करने और इस खर्च के साथ राजकोषीय घाटा का उपयुक्त स्तर क्या हो सकता है, इस पर राजन ने कहा कि यह जरूरी है कि दीर्घकाल में अर्थव्यवस्था को गति देने के लिये लाभदायक कंपनियों पर खर्च किये जाएं।
उन्होंने कहा, ‘‘उनका यह कहना नहीं है कि कुछ भी खर्च किया जाए और खजाना खोल दिया जाए। वास्तव में हमें उन कंपनियों पर खर्च करने की जरूरत है जिससे आने वाले समय में अर्थव्यवस्था को लाभ हो....।’’
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