देश की खबरें | मरीजों से अधिक पैसा वसूलीः उच्च न्यायालय ने महाराष्ट्र सरकार से नियामक तंत्र के बारे में जानकारी तलब की
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. बम्बई उच्च न्यायालय ने मंगलवार को महाराष्ट्र सरकार से पूछा कि क्या यह सुनिश्चित करने के लिए एक नियामक तंत्र है कि कोविड-19 महामारी के दौरान निजी अस्पताल और नर्सिंग होम पीपीई किट और अन्य सहायक वस्तुओं का अधिक पैसा मरीजों से नहीं वसूले।
मुंबई, 28 जुलाई बम्बई उच्च न्यायालय ने मंगलवार को महाराष्ट्र सरकार से पूछा कि क्या यह सुनिश्चित करने के लिए एक नियामक तंत्र है कि कोविड-19 महामारी के दौरान निजी अस्पताल और नर्सिंग होम पीपीई किट और अन्य सहायक वस्तुओं का अधिक पैसा मरीजों से नहीं वसूले।
मुख्य न्यायाधीश दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति सारंग कोतवाल की एक खंडपीठ अधिवक्ता अभिजीत मांगडे द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें कहा गया है कि मुंबई और ठाणे जिले के कुछ निजी अस्पताल पीपीई किट, दस्ताने और एन 95 मास्क जैसी वस्तुओं के लिए रोगियों से अधिक पैसा ले रहे हैं।
यह भी पढ़े | राजधानी दिल्ली में COVID-19 पर हो रहा काबू, सबसे बड़े अस्पताल LNJP में सोमवार को नहीं हुई कोरोना से कोई मौत.
याचिकाकर्ता ने कहा कि उनकी मां को गैर-कोविड-19 उपचार के लिए जून में सात दिनों के लिए ठाणे के जुपिटर अस्पताल में भर्ती कराया गया था और उनसे पीपीई किट और अन्य मदों के लिए 72,806 रुपये लिए गए थे।
मांगडे ने एक अन्य घटना का भी उल्लेख किया जहां एक मरीज से मध्य मुंबई के दादर के एक नर्सिंग होम पुनमिया अस्पताल द्वारा पीपीई किट और अन्य वस्तुओं के लिए तीन दिनों की अवधि के लिए 16,000 रुपये से अधिक लिये गये थे।
अतिरिक्त सरकारी वकील निशा मेहरा ने अदालत को बताया कि राज्य सरकार ने 21 मई को अस्पताल के बिस्तर शुल्क और अन्य वस्तुओं की लागत की सीमा तय करने के लिए एक प्रस्ताव जारी किया था।
पीठ ने यह भी जानना चाहा कि सरकार ऐसे अस्पतालों और नर्सिंग होमों पर कैसे नजर रखे हुए है।
मुख्य न्यायाधीश दत्ता ने कहा, ‘‘क्या कोई नियामक तंत्र है? इस महामारी के दौरान, अस्पतालों द्वारा मरीजों को नहीं लूटा जाना चाहिए।’’
अदालत ने राज्य सरकार और दो अस्पतालों को याचिका के जवाब में अपने हलफनामे दाखिल करने के निर्देश दिये और मामले की अगली सुनवाई की तिथि सात अगस्त तय की।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)
(The above story first appeared on LatestLY on Jul 28, 2020 05:48 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

