नयी दिल्ली, 17 जून फसल उद्योग के विशेषज्ञों ने बुधवार को 27 कीटनाशकों पर तत्काल प्रतिबंध लगाने के बजाय इन्हें धीरे धीरे बंद करने की योजना अपनाने की मांग करते हुए कहा कि, इन पर एक झटके में रोक से इन पर आश्रित किसानों पर असर पड़ेगा।
उन्होंने सरकार को एक ज्ञापन में कहा है कि वह उन छोटे किसानों की आवश्यकताओं सहित कई मुद्दों पर विचार करे, जो लंबे समय से इन कीटनाशकों पर निर्भर हैं।
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केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने 14 मई को, 27 कीटनाशकों पर प्रतिबंध की संस्तुति करने वाली प्रस्तावित कार्रवाई का एक मसौदा जारी किया है। इस पर 45 दिनों के भीतर सार्वजनिक टिप्पणी आमंत्रित की गयी थी। अब इस अवधि को 90 दिन कर दिया गया है।
कई कीटनाशकों की वजह से इंसान और जानवरों के स्वास्थ्य पर खतरा बताते हुए उनके उत्पादन, वितरण व प्रयोग पर रोक लगाने की बात है।
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इस उद्योग के विशेषज्ञों के हवाले से बयान कहा गया है, "किसान पहले ही कोविड-19 और इसके कारण अंतरराष्ट्रीय श्रृंखला के छिन्न भिन्न होने की स्थिति से जूझ रहे हैं। इस फैसले के अचानक सामने आने और बगैर धीरे धीरे चलन से बाहर करने की योजना के बिना कई महत्वपूर्ण उत्पादों को सख्ती से रोकने का फैसला, किसानों के कष्टों को ओर बढ़ा देगा।’’
विशेषज्ञों ने सिफारिश की कि चरणबद्ध योजना में 27 उत्पादों को खतरनाक, कम खतरनाक, विषाक्त, मध्यम रूप से विषाक्त और कम विषाक्त समूहों में वर्गीकृत किया जाना चाहिए और प्रत्येक समूह के लिए अलग निदानात्मक उपचार निर्धारित किया जाना चाहिए और खतरनाक उत्पादों को जल्द से जल्द चलन से बाहर किया जा सकता है।
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